शनिवार, 9 अप्रैल 2011

भारतीय मुसलमान,इस्लाम और आतंकवाद..

कुछ आगे लिखने से पहले बोल दू की मेरी ये रचना तथाकथित सेकुलर लोगों को अच्छी नहीं लगेगी..मगर हाँ एक हिन्दुस्तानी के नजरिये से आप देखें तो शायद सत्यता प्रतीत हो..कृपया सिर्फ शुरु की पंक्तिया पढ़कर किसी नतीजे पर न आयें..


भारत में इस्लाम: भारत में इस्लाम का इतिहास लगभग सातवी शताब्दी से है जो १८ वीं शताब्दी तक रहा..कटु सत्य ये है की ये १००० साल भारत के लिए बहुत ही बर्बर और सामूहिक नरसंहारों से भरे रहे..भारत में बड़ी संख्या में बलात धर्मांतरण ,बलात्कार , अमानवीय अत्याचार किये गए..ये बातें में नहीं कह रहा हूँ इस्लामिक इतिहास में कई जगह ये उल्लेख मिलता है..भारत में इस्लाम के आगमन की योजना ६ वीं शताब्दी में बनायीं गयी...
अरबी इतिहासकार मुजामलुत तवारीखी को सत्य माने तो सन ६३५-६३८ के बिच दमिस्क के खलीफा नए भारत पर आक्रमण की योजना बनायीं और आक्रमण शुरु हो गया उम्मीद से अधिक संगठित हिन्दू विरोध के कारण उसके सैनिक भाग गए..
सन ६६० में पहले इस्लामिक गिरोह ने सफलता पाई भारत के कुछ हिस्सों में कब्ज़ा करने की और उसके बाद हजारो हिन्दुओ के नरमुंड सड़कों पर..कामुकता के मारे हुए इन शासकों ने हिन्दू स्त्रियों का बलात्कार किया और कुछ को कैद किया तो कुछ को दमिस्क में अपने खलीफाओं की भूख मिटने के लिए भेज दिया गया..मंदिर और प्रासाद तोड़े गए..फिर अगले ४ साल तक ये कत्ले आम चलता रहा..
एक अन्य इस्लामिक इतिहासकार अल बिलादुरी के अनुसार" सिनान नमक एक मुस्लिम आक्रमणकारी जो खलीफा के निर्वाचन में यहाँ आया था बहुत ही देवतुल्य व्यक्ति था..उसने अपने सभी सैनिको को पत्नियों से तलक दिला दिया जिससे की
युद्ध के समय पकड़ी गयी हिन्दू स्त्रियों से अपनी काम वासना ये इस्लामी सैनिक बुझा सके..."
मतलब इनका भारत में आना ही लूट मचाने बलात्कार करने और क्रूरता के लिए था..मैं फिर कह रहा हूँ की ये इस्लामिक इतिहासकार ही कह रहें है,..एक अन्य इतिहासकार के अनुसार पकड़ी गयी ५ औरतों में १ को हिन्दुस्थान में रखा जाता था ४ को अरब भेज दिया जाता था खलीफा और उसके गुर्गों के काम वासना तृप्त करने के लिए..
इसी क्रम में अनेक क्रूर कमी मुस्लिम शासकों की लम्बी फेरहिस्त है जिसमें मुहमद गजनवी,कासिम,गोरी,बख्तियार,बलबन,खिज्र बहलोल लोदी,गियासुदीन और ऐसे अनेको आक्रमणकारियों ने भारत के लोगों को लूटा और स्त्रियों का बलात्कार किया..

ये क्रम १००० सालों तक चलता रहा जब तक लुटरों की दूसरी अंग्रेजी पीढ़ी नहीं आ गयी..
अफ़सोस ये है की हम आज भी इन आतताइयों के विरोध में बोलने वालो को सांप्रदायिक बोलतें है. और इतिहास में मुग़ल कल को सबसे उन्नत काल मन जाता है जिस काल में सर्वाधिक बलात्कार,हत्या और धर्मान्तरण हुआ..इन १००० सालों के रक्त रंजित इतिहास को आप और हम या सेकुलर लोग भी झुठला नहीं सकते..
बिच बिच में कुछ हिन्दू शासकों ने प्रबल विरोध किया मगर संगठित न होने के कारण पूरे हिन्दुस्थान को इन इस्लामिक आताताइयों के कब्जे से नहीं वापस ले सके..

आज का हिंदुस्थानी मुस्लिम: अगर आज के वर्तमान समाज के मुस्लिमों को देखा जाए तो 98% मुस्लिमों के पूर्वज हिन्दू रहे थे और उन्हें सीमा से ज्यादा यातना और अत्याचार कर के इस्लाम स्वीकार कराया गया..जिनकी आगे की पीढियां आज की हिंदुस्थानी मुस्लिम के रूप में है...अतः में नहीं समझता कोई मुसलमान भाई इन आताताइयों के समर्थन में होगा ..क्यूकी इन इस्लामी आक्रमणकारियों के शिकार आज के मुस्लिम भाइयों की माँ बहन और परिवार सैकड़ो साल पहले हो चुके थे..
मैं यहाँ किसी पूजा पद्धति या धर्म को बदलने की बात नहीं कह रहा हूँ में सिर्फ हिंदुस्थानी मुस्लिमों को उनका इतिहास और उनकी पीढ़ियों के साथ की गयी बर्बरता को सामने रख रहा हूँ..

आज इस्लाम क्या है:
आज के समय इस्लाम में दो धाराएँ है एक तो अल कायदा के इस्लाम को मानता है एक जो अलकायदा के इस्लाम को नहीं मानता..और दोनों ही धड़े एक दुसरे को गलत कहतें है..
भारत का मुस्लिम क्या अलकायदा समर्थक इस्लाम को मान रहा है: नहीं ,मैं इस तथ्य से बिलकुल सहमत नहीं हूँ..
दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम इंडोनेसिया में रहते है..क्या आप को मालूम है की दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा देश, मुस्लिम जनसँख्या के आधार पर भारत है.. यानि अफगानिस्तान ,पाकिस्तान और अरब कही से ज्यादा मुस्लिम भारत में है..फिर भी यहाँ तालिबान जैसे हमले तो नहीं हो रहें है..न ही यहाँ पाकिस्तान जैसे ब्लास्ट हो रहें है..न ही यहाँ पर ९/११ हो रहा है..अगर सभी मुस्लिम अलकायदा की विचारधारा को मानते तो भारत आज पाकिस्तान की तरह गृहयुद्ध में फसा होता..यहाँ के मुस्लिम की एक अलग सोच बन रही है जो एक नए धर्म "भारतीय मुसलमान" को दर्शाती है..जो अलकायदा का विरोध करता है और भारत को अपना देश मानता है..
मगर शायद कुछ १-२% मुस्लिम ऐसे है जो SIMI को समर्थन देते है ..मंदिरों में बम फोड़ते है..ये संख्या १-२% ही है मगर एक सड़ी मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है..उसी तरह कुछ मुसलमान आने कुकृत्यों के कारण पूरे भारतीय मुसलमानों को बदनाम कर रहें है..यहाँ एक बात और है की शायद इन १-२% मुसलमानों के पूर्वज वो ही आततायी रहे होंगे जो आक्रमणकारी के रूप में आये थे..बाकि के ९८% मुसलमानों के जींस तो हिन्दू ही है सिर्फ उन्होंने पूजा पद्धति बदल ली है..तो स्वाभाविक हिन्दू सहअस्तित्व का गुण तो होगा ही इनमें..
हाँ शायद भारत के मुसलमान की कुछ और समस्याए हो जैसे सामाजिक स्वीकार्यता,वोट बैंक की तरह इस्तेमाल ,साम्प्रदायिक दंगे..इत्यादि इत्यादि..मगर ये सब हिन्दुओं के साथ भी है अतः इसे एक राष्ट्रीय समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए..
मुसलमानों को भी अपना विवेक इस्तेमाल करते हुए उदारता दिखानी चाहिए वरना ये बात भी उठती है की भारत का एकमात्र एक मुस्लिम बहुल राज्य है कश्मीर जहा हिन्दुओं को उनके घर से ही भगा दिया गया..चाहे गुजरात में कितने भी गोधरा हुए हों मगर आज का मुस्लिम वहा रह सका है व्यापार कर सकता है ..मगर ऐसा कश्मीर में हिन्दुओं के लिए क्यों नहीं दोबारा हो सकता क्यूकी १-२% कासिम और बाबर की औलादें अभी भी है भारत में और उनको इस देश से निकलने का काम हमारे मुस्लिम भाइयों का है क्यूकी इन बाबर की औलादों के किये का खामियाजा सामान्य मुस्लिम को चुकाना पड़ता है,देशद्रोही का तमगा सर पर लगाकर..

चलिए एक आह्वान करें ..इन बाबर की औलादों को हिंदुस्तान से बहार करें और हिन्दू बने या मुस्लिम..उन सबसे पहले एक भारतीय बने...

जय हिंद वन्दे मातरम

7 टिप्‍पणियां:

  1. निश्चित रूप से यह लेख विचारयोग्य है इसमें बुरा लगने वाली कोई बात नहीं. यदि किसी को बुरा लगे तो लगे पर यह सौ फीसदी सच है.

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  2. इस सत्य को नाकारा नहीं जा सकता है क्योंकि मैं तो अपने ही दायरे में कितने ही मुस्लिम मित्रों को देख रही हूँ कि हम उनसे दशकों से जुड़े हैं और उनके दिल में कहीं से भी ऐसी भावना नहीं है लेकिन जब भी यहाँ दोनों के मध्य तनाव की बात उठती है वे शर्मिंदा से नजर आते हैं क्यों? इसके पीछे यही हैकि करता कोई और है और उनके किये से शर्मिंदा सबको होना पड़ता है. ये सत्य है जो आपने लिखा है और सभी देशवासियों को यहाँ सर उठा कर जीने का हक है.

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  3. हरीश जी ,रेखा जी: बहुत बहुत आभार आप का ...अच्छा है कम से कम आप ने इसे सेकुलर चश्में से नहीं देखा वरना ये लेख कई स्थापित ब्लोगेर्स को सांप्रदायिक लग रहा है..
    जय हिंद जय भारत

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  4. आशुतोष जी कल ही मैंने प्रतिक्रिया दी थी. वो मेरी टिप्पड़ी कहाँ खो गयी? बड़ी ना इंसाफी है यह!!

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  5. मदन शर्मा ने कहा…
    ..............................
    हमें तो महर्षि स्वामी दयानंद ka upkar manana chahiye .उन्होंने ही हिन्दुओं को अपने देश और धर्म के प्रति कटिबद्ध होने का आन्दोलन चलाया था .वर्ना हिन्दू hi खुद को हिन्दू कहलाने से लज्जा करते थे .जो भी आता था हिन्दू धर्म पर आरोप लगा देता था ,और हिन्दू चुप रह जाते थे .जब हिन्दू ठीक से अपने धर्म ग्रंथो को ठीक से नहीं जानते ,और दूसरों के धर्म ग्रंथों की बात तो दूर रही .फिर हिन्दू सटीक जवाब कैसे दे सकते थे. bahut thik likha hai aapn

    .............................
    १२ अप्रैल २०११ १०:४२ पूर्वाह्न
    मदन शर्मा ने कहा…
    अब होते अत्याचारों पर
    मिलकर ये हुँकार भरो
    कहाँ छिपे हो घर मैं बेठे
    निकलो और संहार करो
    आतंकी अफजल , कसाब को
    और नहीं जीने दो अब
    घुस जाओ जेलों मैं मित्रो
    आओ मिलकर वार करो
    कोन है हिटलर ? कोन है हुस्नी ?
    किसका नाम है गद्दाफी ?
    दुष्टों को बस मोत सुना दो
    देना नहीं कोई माफ़ी ….
    कि जो कोई साथ दे उनका ,
    बजाय हुक्म माली सा ,
    सजाय मोत दो उनको
    रूप हो , रोद्र काली सा
    .........................
    १२ अप्रैल २०११ ११:३५ पूर्वाह्न

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  6. मदन जी बहुत बहुत आभार आप का उत्साह वर्धन के लिए और हिंदुत्व के विरोधियों के लिए सुन्दर कविता के लिए..
    आप की टिप्पणी मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग पर थी वहां भी मैंने ये पोस्ट कुछ कारणों से लगायी है...
    धन्यवाद आशा है आगे भी आप का उत्साहवर्धन मिलता रहेगा..

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  7. आशुतोष जी आप इसी तरह हिन्दू समाज की बात बुलंद करते रहे. कठ्मुल्लाओ पर ध्यान न दे, बाबर की औलादें जो पाकिस्तान के जितने पर जश्न मानते हैं ऐसे लोंगो को देश से बाहर निकलना जरुरी है. यह लोग आप जैसो की भाषा आसानी से समझते हैं. हरीश जैसे दोमुहे लोंगो पर ध्यान न दे. मैं भी आपके संगठन से जुड़ना चाहता हूँ. मेरा इ-मेल है....... satybolnapaphai@gmail.com

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