बुधवार, 25 मई 2011

कहाँ गए वो चाणक्य जो एक हजार चन्द्रगुप्त तैयार कर अखंड भारत की नीव रखते थे , लगता है आधुनिकता खा गयी !




भाइयों यह बड़ा सामन्य लगने वाला किन्तु बड़ा गंभीर विषय है ,आज यह विषय कई बार छेड़ा जाता है किन्तु मात्र इसे निबंध समझ कर किताबों या अभ्यास पुस्तकों में कैद कर लिया जाता है , आज समय फिर से चाणक्य ,गुरु वशिष्ठ और गुरु विश्वामित्र की मांग कर रहा है जो श्री राम और चन्द्रगुप्त जैसे राष्ट्रभक्त राजाओं को जन्म दे अखंड भारत का पतन रोक सकें ,किन्तु प्रश्न यह है कहाँ हैं वो गुरु जो श्री राम और चाणक्य को तैयार कर देश का पतन रोक सकें ,कहाँ हैं हमारी वो मर्यादाएं और सभ्यताएँ ,क्या आधुनिकता उसे खा गयी या मैकाले की शिक्षा पद्दति ने उसे निगल लिया ,शर्म आती है आज के पब्लिक स्कूल के अध्यापकों को अध्यापक या गुरु कहते हुए ,सुप्रसिद्ध चाणक्य धारावाहिक में एक संवाद था -"जब राष्ट्र की बागडोर राजा नहीं संभल पता तो शिक्षक उसे संभालता है " क्या आप इस बात को मानते हैं आज के सन्दर्भ में ,नहीं यह विचारधारा जो करीब ३००० वर्षों पूर्व चली थी आज मुल्लों और अंग्रेजों की गन्दी नीतियों तथा आजादी के बाद नेहरु जैसे कुत्तों के चलते गर्त में मिल गयी और आज उसका सम्पूर्ण नाश करने में सहयोगी मीडिया और बॉलीवुड है और विरोध करो तो हम जैसे लोग बंद दिमाग वाले और नालायक की संज्ञा पाते हैं ,वाह भाई वाह 
जब युद्ध भूमि पर धर्मराज युधिष्ठिर गुरु द्रोणाचार्य से युद्ध की आज्ञा  तथा आशीर्वाद लेने गए तो गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें बड़े महत्त्व की बात कही जो उनकी ओर इंगित थी उन्होंने कहा -"शिष्य जो गुरु अपनी विद्या का सौदा कर देता है वो आदरणीय नहीं होता बल्कि अर्थ का दास होता है " आज ऐसे हजारों द्रोणाचार्य भारतीय सभ्यता के चीरहरण में चटखारों के साथ योगदान कर रहे हैं ,कैसी शर्मनाक स्थिति है ,

आज सारे गुरु विद्या का सौदा करते हैं और वही शिष्य उन्हें पसंद आते हैं जो गुंडागर्दी कर स्वयं को स्मार्ट कहते हैं थू !
मैं अपना एक किस्सा सुनाता हूँ मेरी अंग्रेजी की अध्यापिका ने मुझसे कहा -"इस उम्र में लड़के कटरीना कैफ के पीछे भागते हैं और तुम क्रांतिकारियों के पीछे "
क्या विचार है थू !
एक हमारे एक और महाशय अध्यापक श्री विक्रांत पाण्डेय भी धन्य हैं ,कक्षा में आकर बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार देने के बजाय डबल अर्थी गंदे शब्द और गालियों के साथ भद्दे चुटकुले सुनाते हैं |
कितनी महान शिक्षा है वाह !
मेरी एक बार उनसे हिंदुत्व को लेकर बहस छिड़ गयी और उन्होंने मेरे पिताजी से यह शिकायत कर दी की मैं -मुस्लिम विरोधी हूँ जिसकी वजह से मुझे घर में फटकार मिली 
वाह वाह क्या अध्यापक धर्म है 
चाहे आप इसे मेरी व्यक्तिगत भड़ास कहें या मेरा क्रोध किन्तु स्थिति इतनी ही कुरूप है 

बताइए गुरु धर्म के गिरते हुए स्टार का जिम्मेदार मैं किसे कहूँ और आप किसे कहेंगे -
नेहरु को?
अंग्रेजों को ?
मैकाले को ?
या 
शर्मनिरपेक्षता को |

यह उत्तर देना हर एक का नैतिक कर्त्तव्य है क्योंकि मेरी तरह आप का भी बच्चा पब्लिक स्कूलों में पढता होगा!

जय श्री राम !

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा प्रयास है आपके बधाई हो आपको!
    स्पष्ट्वादी व्यक्ति अपने खरे बोलों से समाज का तो हित कर जाता है ,किन्तु खुद को सबकी निगाह में गुनाहगार बना जाता है ।हालांकि बाद में वही सच्चा साबित होता है ...

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  2. शर्मनिरपेक्षता को...स्वयं को....

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