बुधवार, 9 नवंबर 2011

आजमगढ़ से अंडमान : नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) राष्ट्रीय बाल पुरस्कार हेतु चयनित


प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. तभी तो पाँच वर्षीया नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2011 हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) के लिए चयनित किया गया है. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री अक्षिता को यह पुरस्कार 'कला और ब्लागिंग' (Excellence in the Field of Art and Blogging) के क्षेत्र में शानदार उपलब्धि के लिए बाल दिवस, 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीर्थ जी द्वारा प्रदान किया जायेगा. इसके तहत अक्षिता को 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र दिया जायेगा.

यह प्रथम अवसर होगा, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया जायेगा. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है. फ़िलहाल अक्षिता पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा हैं और उनके इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर अनेकोंनेक शुभकामनायें और बधाइयाँ !!

ट्रैफिक जाम...............





















देखो रे देखो भाई लोकतंत्र का खेल  ट्रैफिक जाम
आज
भारत वर्ष के हर शहर में ट्रैफिक जाम कि समस्या हो रही है सरकार का क्या
फर्ज है ? सरकार क्या कर रही है ? जबकि ट्रैफिक पुलिस हर जगह पर ड्यूटी पर
है !

इन दिनों शहर में खूब ट्रैफिक जाम होता है , |
सरकार को गालियाँ देते है ,
पुलिस क्या कर रही है ?
सब एक दूसरे को कोसते भी है ,
फिर धुल धुंआ खाते हुए देर तक - गुत्थम गुत्था होते है , |
एक दूसरे कि गलतियाँ निकालते है ,
आगे गयी गाडी कुछ पीछे आती है ,
पीछे कि गाड़ियां कुछ और पीछे जाती है ,
देर तक यही सब चलता है ,
फिर कुछ जगह बन पाती है ,
घर - पहुंचते पहुंचते चिड चिड़े सा भी हो जाते है |
पर क्या यह कोई सोचता है ?
आखिर ट्रैफिक जाम क्यों होता है ?
क्या इसकी वजह हमारी तुम्हारी जल्दबाजी नहीं है ?
अब भाई सोचो !
क्या ट्रैफिक जाम होगा ?
                                            अगर सब लोग - अपनी अपनी कतार में चलते है | .
पुलिस वालो का क्या ?
वह तो ड्यूटी पर है ,
परेशान तो जनता को होना है ,
केश लिखाओ , जेब गर्म करो तो उनकी निंद्रा खुलती | है

बदनियती को करें नियंत्रित


आज के i- next की रिपोर्ट सड़क पर लड़कियों की सुरक्षा, कसे जाने वाले तंज, भद्दी फब्तियाँ, अपराधिक घटनाएँ इत्यादि, शायद इस ख़बर को पढ़ते समय महिला समाज की प्रतिक्रिया ऐसी हो, ‘‘ये सब तो रोज़ होता है। इसे क्या पढ़ना इससे ज्यादा तो हम जानते हैं और झेलते हैं।’’ और पुरूष समाज के संवाद होंगे, ‘‘ इतनी स्वतंत्रता लेंगी तो यही होगा। और चलो सड़कों पर मनमौजी अंदाज में।’’ पर क्या इतनी सी प्रतिक्रिया इस विषय की गंभीरता को कम कर देती है? बात करें अगर उस छोटी बच्ची की जिस पर कसी गई अश्लील फब्ती का उसे अर्थ भी नही पता परन्तु आस-पास वालों की उपाहासनीय-निर्लज हँसी फिर भी उसे लज्जित कर देती है या उस बच्ची की जिसे कोई अनजाना असुरक्षित स्पर्श सहमा देता है; क्या मानसिक स्थिति रहती होगी उस बच्ची की उस समय? दो दिन पूर्व की घटना जिसमें एक पॉश कॉलोनी में रहने वाले वकील साहब की नीयत दो मासूम बच्चियों पर बिगड़ गई; पढ़ने-देखने-सुनने वालों के लिए चंद घंटों बाद यह आई गई घटना हो गई या निकटस्थ पड़ौसियों के लिए चटपटी गॉसिप का विषय, परन्तु क्या किसी ने उन बच्चियों पर इस घटना के पड़े प्रभाव के विषय में सोचा है? क्या वे बच्चियाँ ता उम्र इस घटना के मानसिक दबाव से उभर पायेंगी? क्या उनका विकास सामान्य रूप से हो पायेगा? क्या फिर वे किसी अंकल पर विश्वास कर पायेंगी? हंसी ठिठोली करने वालों के लिए दो पल का मजा है और पीडिताओं के लिए मस्तिष्क के किसी कोने में हर पल की सिसकियाँ और घुटन। ज़रा समझिये और स्वीकार कीजिए कि खुश्नुमा और स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार हम लड़कियों को भी ईश्वर ने समान रूप से प्रदत्त किया है। किसी भी विकृत मानसिता को न तो यह हक छीनने का अधिकार है और न ही महिलाओं को यह हक थाल में परोसकर देने की आवश्यकता है।

रविवार, 6 नवंबर 2011

भाई राजीव जी के स्वदेशी आन्दोलन की अगली कड़ी - स्वदेशी पीठम ...



मित्रों..
आजादी बचाओ आन्दोलन के संस्थापक भाई राजीव दीक्षित  जी के नाम से हम सभी परिचित  हैं..
सत्य अर्थों में कहें तो एक अमर हुतात्मा जिसके अन्दर राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्र स्वाभिमान की भावना कोटि कोटि विद्यमान थी..काल चक्र अनवरत चलने के साथ साथ कभी कभी धैर्य परीक्षा की पराकाष्ठा करते हुए हमारे प्रति  क्रूर हो जाता है..कुछ ऐसा ही हुआ और इसे देशद्रोही विरोधियों का षड्यंत्र कहें या नियति का विधान राजीव भाई पिछले साल हमारे बिच से चले गए ..समयचक्र चलता रहा और कब एक साल निकल गया पता ही नहीं चला मानो प्रतीत होता है , कल की ही बात है जब राजीव भाई अपने व्याख्यानों एवं प्रयोगों से हमारा मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन कर रहें है..पिछले  एक वर्ष  में कई बार ऐसा प्रतीत हुआ की राजीव भाई के जाने के बाद स्वदेशी और आजादी बचाओ आन्दोलन अपने असामयिक अंत की ओर न बढ़ जाये.. मगर शायद राजीव जी और विवेकानंद जैसे महापुरुषों को इश्वर मनुष्यता के एक प्रेरणाश्रोत के रूप में हमारे बीच अल्पावधि के लिए भेजता है जिनके स्थापित उच्च आदर्शो और विचारों पर चलकर मानवता,धर्म ,देशभक्ति एवं समाज के पुनर्निर्माण की नीव रक्खी जानी है...राजीव भाई के स्वप्न एवं जनजागरण के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उनके अनुज भाई प्रदीप दीक्षित  ने बाबा रामदेव जी के आशीर्वाद से स्वदेशी भारत पीठम ट्रस्ट के माध्यम से पुनः आन्दोलन को आगे बढ़ाने का कार्य प्रारंभ किया है.. इसी कड़ी में राजीव भाई की कर्मस्थली वर्धा में, उनके जन्मदिवस और प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर  "स्वदेशी दिवस" समारोह  का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश के विभिन्न भागों से लगभग ४ से ५ हजार लोग उपस्थित होंगे..इसी सन्दर्भ में प्रदीप दीक्षित जी का व्याख्यान ६ नवम्बर(रविवार) को नई दिल्ली में जनकपुरी स्थित आर्य समाज मंदिर में भाई अरुण अग्रवालजी के देखरेख एवं प्रबंधन  में संपन्न हुआ..
औपचारिक रूप से स्वदेशी भारत पीठम की ये पहली कार्यकारिणी बैठक भी थी जिसमें दिल्ली और पास के राज्यों से कुछ समर्पित कार्यकर्त्ता उपस्थित हुए एवं सेवाग्राम में होने वाले स्वदेशी मेले के आयोजन के सन्दर्भ में परिचर्चा की गयी...
आप सभी बंधुओं,माताओ एवं बहनों से अनुरोध है की "स्वदेशी दिवस" समारोह में वर्धा सेवाग्राम में उपस्थित  होकर अपने विचारो से अवगत कराएँ एवं राजीव भाई के स्वदेशी,स्वावलंबी भारत के कार्यक्रम में सहयोग करके राष्ट्रनिर्माण के पावन कार्य में सहयोग दे....
अधिक जानकारी के लिए आप  राजीव भाई की वेबसाइट  पर जा सकते हैं..



जय श्री राम....
हिंदी हिन्दू हिन्दुस्थान 



शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

ईमानदार आदमी सांप हैं ??

ईमानदार आदमी सांप हैं ??






तुम बिल में ही रहो

बाहर झांको और घुस जाओ

अँधेरे में

कोई संकीर्ण रास्ता गली

ढूंढ रौशनी ले लो

हवा ले लो

सांस ले लो

त्यौहार पर हम चढ़ावा दे देंगे

दूध पिला देंगे

जब की हम जानते हैं

तब भी तुम हमारे लिए

जहर उगलोगे

जब भी बाहर निकलोगे

देव-दूत बन डोलोगे

मेला लग जाता है

भीड़ हजारों लाखों लोग

आँख मूँद तुम पर श्रद्धा

जाने क्या है तुम में ??

औकात में रहो

देखा नहीं तुम्हारे कितने भाई मरे

हमारे मुछंडे मुस्तैद हैं

फिर भी तुम्हारी जुर्रत

बाहर झांकते हो

आंकते हो -हमारी ताकत ??

फुंफकारते हो

डराते हो

हमारे पीछे है एक बड़ी ताकत

बिके हुए लोग भ्रष्ट ,चापलूस

भिखारी , गरीब , भूखे -कमजोर

बहुत कुछ ऐसे -कवच ----

फिर भी जाने क्यों

हमारे दिल की धडकनें भी

बढ़ जाती हैं

मखमली गद्दों पर नींद नहीं आती है

नींद की गोलियां बेअसर दिखती हैं

बीबी बच्चों से दूर

अकेले में निस्तब्ध रात्रि में

मै भी हाथ जोड़ लेता हूँ

तुम्हारे आगे

की शायद ये डर भागे ------

शुक्ल भ्रमर -.१३-.२५ पूर्वाह्न

यच पी .११.2011