पहले जर जोरू ज़मीन पर -
झगड़े होते थे;
और खानदानी रंजिश के ,
बीज बोते थे |
पूरे के पूरे घर,कुटुंब, गाँव-
के सफाए होते थे |
खेतों खलिहानों में कभी कभी-
वलात्कार भी होते थे ||
आज हम लंगोटी की जगह,
सूट पहनने लगे हैं,
तीर तलबार की जगह ,
बन्दूक रखने लगे हैं |
झोंपडी की जगह-
अट्टालिकाओं में रहने लगे हैं |
टाटा सफारी क्वालिस व सेंट्रो कार में
चलने लगे हैं |
अतः ह्त्या व वलात्कार -
राह चलते होने लगे हैं ||
हमने बहुत प्रगति की है ,
यह सही है ;
पर मन से व कर्म से,
लगता है, हम वहीं हैं;
वहीं के वहीं हैं ||
झगड़े होते थे;
और खानदानी रंजिश के ,
बीज बोते थे |
पूरे के पूरे घर,कुटुंब, गाँव-
के सफाए होते थे |
खेतों खलिहानों में कभी कभी-
वलात्कार भी होते थे ||
आज हम लंगोटी की जगह,
सूट पहनने लगे हैं,
तीर तलबार की जगह ,
बन्दूक रखने लगे हैं |
झोंपडी की जगह-
अट्टालिकाओं में रहने लगे हैं |
टाटा सफारी क्वालिस व सेंट्रो कार में
चलने लगे हैं |
अतः ह्त्या व वलात्कार -
राह चलते होने लगे हैं ||
हमने बहुत प्रगति की है ,
यह सही है ;
पर मन से व कर्म से,
लगता है, हम वहीं हैं;
वहीं के वहीं हैं ||