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गुरुवार, 9 जून 2011

बद अच्छा बदनाम बुरा.....

बद अच्छा  बदनाम बुरा एक यह कहावत है बिलकुल सही है आज के वक़्त मैं जब किसी को कोइए तमगा मिल जाता है तब उसको वह काम करना उसकी मजबूरी बन जाता है

आजकल पूरा का पूरा अमला बाबा रामदेव के पीछे पड़ा है जिसको देखो वही बाबा के साथ किसी न किसी रूप मैं जुड़ा है लेकिन सरकारी अमला बाबा को RSS का AGENT बताता है और तो और बाबा को बीजेपी का बताया जाता है बाबा को भगवा आतंकवादी बताया  जाता बाबा तो बाबा,बाबा कुछ कम नहीं कुछ न कुछ उल्टा सीदा बक देता है बाबा बाद अच्छा बदनाम बुरा 

कुछ कर बाबा नहीं तो यह कमीने जीने नहीं देंगे अब नहीं तो कुछ दिन बाद यह सरकार या तो बाबा को मरवा देगी नहीं तो बाबा को भगवा आतंकवादी घोषित कर देगी .......वह तो बाबा की किस्मत अच्छी थी जो उस काली रात को बच गया अतः बाबा बोल कम और काम जयादा कर

जय बाबा बनारस...

गुरुवार, 26 मई 2011

जड विहीन...डा श्याम गुप्त....

 (अगीत छंद )

मैं बुरा न बन पाया,
अत: बदनाम हूं ।
बदनीयत नहीं बन पाया,
नाम हीन हूं ।
भ्रष्टाचार की दिशा तय नहीं करपाया,
दिशा हीन हूं ।
प्रोटोकोल नहीं निभा पाया,
अनुशासन हीन हूं ।
क्योंकि मेरी पीठ पर किसी का हाथ नहीं है,
मैं जड विहीन हूं ॥