सोमवार, 9 मार्च 2020



नफरत की ज्वाला में,
घी का हवन देते,
कुछ लोग,
तस्वीरें बनाते,
आविष्कार करते,
आपस में उलझे हैं,
आग उसने लगाई,
इस ने लगाई,
खुद जली,
बतिया रहे,
बची हुई सांसों को,
सुलगते अंगारों से,
जहरीले धुएं में,
हवा देते,
घुट घुट के जीते हुए,
छोड़ कहीं जा रहे,
हरी भरी तस्वीरें
काली विकराल हुई
मूरत की सूरत में
आंखें बस लाल हुईं
काश कुछ बौछारें,
शीतलता की आएं,
दहकती इन लपटों की
अग्नि बुझाएं,
धुंध धुएं को हटाएं,
पथराई आंखों में आंसू तो आएं
स्नेह की , दया की ,
भूख की प्यास की ,
जीवन के चाह की,
चमक तो जगाएं
सुरेंद्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' 5

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

झारखंड चुनाव के संदेश


झारखंड से प्राप्त चुनाव के रुझान से आभास हो रहा है कि  भारतीय जनता पार्टी पिछले चुनाव के अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं पाएगी। पिछली बार उसे 37 सीटें विधानसभा में प्राप्त हुईं थीं और अब की बार ऐसा लग रहा है कि ये  आंकड़ा  30 से आगे नहीं बढ़ पाएगा. बहुत स्पष्ट है कि यह भारतीय जनता पार्टी की नैतिक पराजय है और वह जोड़ तोड़ कर सरकार भले ही बना ले जिसकी संभावना भी कम लग रही है क्योंकि उसके पूर्व सहयोगी आजसू और झारखंड विकास मोर्चा को मिलाकर  भी इतनी सीटें नहीं मिल पा रही हैं जिससे सरकार बनाना संभव हो। चुनावों से से बहुत पहले आगाज हो गया था कि झारखंड में भाजपा सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी औr कारण भी स्पष्ट थे और भारतीय जनता पार्टी को शीर्ष नेतृत्व को यह कारण मालूम भी होंगे लेकिन इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया तो यह आश्चर्यचकित करने वाला है। भाजपा अगर सिर्फ वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास को हटाकर किसी अन्य व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना देती तो भी संभावित नुकसान को रोका जा सकता था लेकिन भाजपा ने ऐसा नहीं किया।

भाजपा की हार के कारण
1. 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 37 सीटें मिली थी और उसने आजसू और जेवी एम  के साथ मिलकर सरकार बनाई थी । मुख्यमंत्री के रूप में रघुवर दास का चयन किया गया जो गैर आदिवासी थे इसलिए राज्य की जनसंख्या संतुलन के हिसाब से सबसे उपयुक्त उम्मीदवार नहीं थे।  भाजपा  ने  बहुत  आत्मविश्वास के साथ यह सोचा होगा कि केंद्र में सरकार होने के कारण राज्य में विकास के बहुत सारे कार्य होंगे और अगले 5 सालों में माहौल बदल जाएगा लेकिन रघुवर दास ऐसा नहीं कर सके हालांकि उन्होंने बहुत मेहनत की और विकास के कार्य भी हुए लेकिन शुरू से ही उनकी स्वीकार्यता आदिवासी वर्ग में नहीं थी।  आदिवासी क्षेत्रों में  कार्य करने के बाद भी रघुवर दास आदिवासी इलाकों में ही अपनी जगह नहीं बना पाए।

2. केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों ने भी राज्य में भारतीय जनता पार्टी को लगभग हराने का ही काम किया । ऐसा लगता है कि केंद्र और राज्य के सभी सहयोगी दलों  ने केवल एक फार्मूले पर किया कि अपनी दीवार गिरे तो गिरे लेकिन पड़ोसी की भैंस मर जाना चाहिए यानी कि खुद का नुकसान हो तो हो लेकिन भाजपा को फायदा नहीं होना चाहिए।  लोक जनशक्ति पार्टी और  जेडीएस जिनका कोई बहुत प्रभाव राज्य में नहीं है उन्होंने ज्यादा से ज्यादा सीटों की मांग रखी जो शायद भाजपा के लिए संभव नहीं था इसलिए इनके साथ समझौता नहीं हो पाया ।

3.  राज्य में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सहयोगी दलों  ने स्थिति भांपते हुए हुए अधिक से अधिक सीटें हासिल करने की मांग रखी और यह रस्साकशी इतनी चली कि आखिर तक बात नहीं बनी और समझौता नहीं हो सका।  इसलिए और सभी दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और जैसा कि पहले से ही मालूम था लोक जनशक्ति पार्टी और जेडीएस अपना खाता भी नहीं खोल सकी और आजसू और जेवीएम   यह भी हम को भी खासा नुकसान उठाना पड़ा।

4. जो भी हो भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों को अपने साथ रखने में सफल नहीं हो सकी और परिणाम स्वरूप एक और राज्य में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता गंवानी पड़ेगी। 
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                                #शिव प्रकाश मिश्रा


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बुधवार, 20 नवंबर 2019

Mujhe Yaad aaoge - Hindi Kavita Manch

मुझे याद आओगे


कभी तो भूल पाऊँगा तुमको, 
मुश्क़िल तो है|
लेकिन, 
मंज़िल अब वहीं है||

पहले तुम्हारी एक झलक को, 
कायल रहता था|
लेकिन अगर तुम अब मिले, 
तों भूलना मुश्किल होगा||

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

अल्लाह को कहा जाता है यालेमुल गैब 
यह मात्र कहने की बात है, की अल्लाह अदृश्य या छुपी हुई बातों को जानता है। जबकि यह सत्य नहीं है। क्योकि यदि अल्लाह अदृश्य को जानता तो अपने पैगम्बर और खलीलुल्लाह पैगम्बर(अल्लाह का दोस्त) जिन्हें लोग इबराहीम के नाम से जानते हैं। उसका इम्तिहान न लेता। बताया जाता है की अल्लाह ने अपने दोस्त से इम्तिहान लेना चाहा था।

किस चीज की इम्तेहान ली, अपने सबसे प्यारी चीज की क़ुरबानी देने की। जिसे अल्लाह ने अपने दोस्त इबराहीम को ख्वाब में दिखाया था।
तो लगातार तीन दिन तक पशु काटते रहे अल्लाह के दोस्त इब्राहीम! किन्तु अल्लाह को यह स्वीकार नहीं हुआ।  अल्लाह का इम्तेहान तो अभी बाकि रह गया था।

इब्राहिम ने फिर ख्वाब देखा की अल्लाह इब्राहीम से कह रहे हैं जो सबसे प्यारी चीज  है तुम्हारी, उसे मेरे रास्ते में कुर्बान करो।
 इब्राहीम ने अपनी दासी से जो संतान पैदा किया था उसका नाम इस्माईल था। उस समय तक इब्राहीम अपनी पत्नी सारा बीवी से संतान नहीं पैदा कर पाए थे। इस इस्माईल को जविह उल्लाह कहा।

 इब्राहीम ने अपनी पत्नी सारा के कहने पर इसी दासी को जिनका नाम बीवी हाजरा था, घर से बाहर निकाल दिया था -और बियावान जंगल में या फिर निर्जन मरूभूमी(रेगिस्तान) में छोड़ आये थे। जहाँ पानी तक का ठिकाना नहीं!
माँ हाजरा और बेटा इस्माईल प्यास के मारे उस निर्जन रेगिस्तान में इधर उधर भटक रहे थे। रेतीले पहाड़ पर मृग मरीचिका को पानी समझ कर सफा और मरवा नामक दो पहाड़ों के बीच में पानी के लिए वह भागती रही।

किन्तु वहां पानी तक नहीं मिला। सात बार पानी की खोज में बिवी हाजरा दौड़ती रही जिसकी चर्चा कुरान में भी की गई हैं जैसा =  إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللَّهِ ۖ فَمَنْ حَجَّ الْبَيْتَ أَوِ اعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَا ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًا فَإِنَّ اللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ [٢:١٥٨]
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं पस जो शख्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़दरदाँ (और) वाक़िफ़कार है।

आज तक इसे हज यात्रीयों को भी करना ही पड़ता है जो बीवी हांजरा ने की थे। उसी की याद करने का आदेश मुसलमानों को दिया है अल्लाह ने।
सवाल यह पैदा होता है की अल्लाह ने अपने दोस्त का इम्तेहाँन लिया = की वह अपने बेटे को क़ुरबानी दे सकते हैं या नहीं ?

किन्तु इस्लाम वाले यह नहीं  जानते की इम्तेहान लेने वाला अल्पज्ञ होगा सर्वज्ञ नहीं हो सकता। क्योंकि इम्तेहान या परीक्षा वही लेता है जो नहीं जानता है की यह क्या करता है? अर्थात परिणाम जिसे ज्ञात नहीं है उसे जानने के लिए इम्तेहान ली जाती है। और यही बात अल्लाह के लिए है।  फिर अल्लाह अदृश्य के बातों का जानने वाला कैसे हो गया?

दूसरी बात है की अल्लाह ने इब्राहीम को ख्वाब दिखाया की अपनी सबसे प्यारी चीज को मेरे रास्ते में क़ुरबान करो। तो इब्राहीम को अपना बेटा सबसे प्यारा कहाँ था? अगर बेटा इतना ही सबसे प्यारा  होता तो उसे माँ के साथ घर से क्यों निकाल बाहर करता?   जिसे घर से बाहर पीने के लिए पानी तक नहीं दिया वह सबसे प्यारा कैसे?  जिसे वह पानी तक मुहैया नहीं करा सके वह प्यारा क्यों और कैसे?
क्या यही पैगम्बर हैं, और अल्लाह के दोस्त भी, यही निष्ठुरता को जिसने पशुओं को काट कर दिखाया।

यह बिलकुल झूठी बातें है कपोल कल्पित बातें है। यह अंध विश्वासका पराकाष्ठा है। उसी अंध विश्वास में आज समस्त धरती को सिर्फ धर्म के नाम पर पशुओं के खून से रंगा जा रहा है।
चूंकि यह पूरी घटना अल्लाह,कुरान और इस्लाम से जुडी है और इसे धर्म कहकर धर्म को भी दूषित किया गया है। लेकिन इस तरह के कारनामों के आधार पर यह धर्म का होना कभी भी संभव ही नहीं है। कुरान में अनेक बार इस किस्से को बताया गया है। समय समय पर आगे भी लिखता रहूँगा।
घन्यवाद के साथ
महेन्द्रपाल आर्य 
12 /8 /19 
निन्दन्तु नीति निपुणा यदिवा स्तुवन्तु ,लक्ष्मी समाविशतु ,गच्छतु वा यथेष्ठटम ,
अद्यैव मरण मस्तु युगंतारेव ,न्यायात प्रविचलन्ति .पदम्  धीरः 
"                                                    
लोग निंदा करें या स्तुति करें ,धन आवे या हम कंगाल हो जाएँ .
अभी मर जाएँ या युगों के बाद मर जाएँ ,
लेकिन सत्य के मार्ग से विचलित नहीं हो सकते .