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शनिवार, 5 मार्च 2016

अभिव्यक्ति की आजादी

अभिव्यक्ति की आजादी
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पढ़ते हुए बच्चे का अनमना मन
टूटती ध्यान मुद्रा
बेचैनी बदहवासी
उलझन अच्छे बुरे की परिभाषा
खोखला करती खाए जा रही थी .......
कर्म ज्ञान गीता महाभारत
रामायण राम-रावण
भय डर आतंक
राम राज्य देव-दानव
धर्म ग्रन्थ मंदिर मस्जिद ..और भी बहुत कुछ ..
पी एच डी कर भी जेल जाना
गरीब अमीर परदा दीवार
आरक्षण भेदभाव मनुवाद सम्राज्य्वाद
सब मकड़जाल सा उलझा तो
बस उलझता गया…. दिमाग सुन्न.......
किताबें फेंकशोर में खो गया
गुड्डे गुड़िया के खेल में
अचानक क्रूरता हिंसा ईर्ष्या जागी
कपडे नोंच चीड़ फाड़ रौंद पाँव तले

नर- सिंह  सा हांफ गया ............................
आजादी -आजादी इस से आजादी उस-से आजादी या फांसी ?
अभिव्यक्ति की आजादी ...
कुछ लोगों की भेंड़ चाल झुण्ड देख
वह दौड़ा अंधकार में अंधे सा ....
माँ ने एक थप्पड़ जड़ा ..रुका ……
आँचल से पसीना पोंछ ..समझाया
बैठाया… प्यार से पोषित करदिखाया
देख !  चिड़िया भी अपना घर तिनके तिनके ला
बनाती  हैं घोंसला… उजाड़ती नहीं
बन्दर मत बन -….उजाड़ -आग -विनाश नहीं
जिस थाली में खाते हैं छेद नहीं करते
अपना घर परिवेश समाज देश समझ
संस्कार प्यार ईमान धर्म कर्म
तेरे खोखले पी. यच. डी. विज्ञान पर भारी हैं
भूख ..गरीबी जाति धर्म नहीं देखती
ये वाद .. वो वाद ..विवाद ही विवाद
सामंजस्य समझौता परख जाँच
जरुरी है महावीर बुद्ध ज्ञानी बनने हेतु
शून्य में विचर पानी में लाठी मत पीट
कुएं में एक भेंड़ कूदी
फिर सब सत्यानाश ...हाहाकार
जंगल राज ..अन्धकार से सहजता में
सरल बन ..शून्य बन
फिर ऊंचाइयों में चढ़ना आसान है
बच्चे ने आकाश की ऊंचाइयों में झाँका
कुछ आँका ..जाँचा
समझ गयी थी
आग लगाने से विकास नहीं होता
होता है विनाश ..नंगापन का नाच
भूख नहीं मरती
कटुता ही है बढ़ती
और हम जाते हैं ग्राफ में नीचे
पचास साल और पीछे
और फिर तिरंगा ले वह सावधान हो गया
वन्दे मातरम ..
जय हिन्द .....
उहापोह अब सुसुप्ति में चुका  था ...
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर
कुल्लू यच पी
-.५२ पूर्वाह्न

२८ फरवरी २०१६

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

कदम ताल से धरती कांपी- चले हिन्द के वीर

कदम ताल से धरती कांपी
चले हिन्द के वीर
लिए तिरंगा चोटी  चढ़ के
   गरजे ले शमशीर .............
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भारत माँ ले रहीं सलामी
खुशियों का सागर उमड़ा
गले मिले सन्तति सब उनकी
ह्रदय कमल खिल-खिला पड़ा
कदम ताल से धरती कांपी ................
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भारत माँ   हैं जान से प्यारी
संस्कृति अपनी बड़ी दुलारी
प्रेम शान्ति का पाठ पढ़े हम
अनगिन भाषा खिले हैं क्यारी
कदम ताल से धरती कांपी ................
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नई नई नित खोज किये हम
विश्व गुरु बन दुनिया पाठ पढाये
वसुधा सागर गगन भेद के
सूक्ष्म ,तपस्या योग सिखाये
कदम ताल से धरती कांपी ................
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हम  स्वतंत्र हैं प्रजातंत्र है
अपना सब का प्यारा राज
यहाँ अहिंसा भाईचारा नीति नियम है
 सभी मनाएं भाँति -भांति हिल-मिल त्यौहार
कदम ताल से धरती कांपी ................
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शेर हैं हम नरसिंह है हम वीर बड़े हैं
अर्जुन एकलव्य से हैं तो भीष्म अटल हैं
कायर दुश्मन वार कभी पीछे करते हैं
लिए तिरंगा छाती चढ़ते वीर हमारे अजर अमर हैं 
कदम ताल से धरती कांपी ................
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प्रेम शान्ति का पाठ पढो हे दुनिया वालों
ना कर तांडव नाश सृष्टि का इसे बचा लो
ज्ञान दंभ पाखण्ड लूट बेचैनी से तुम घिरे पड़े हो
अन्तः झांको ,ज्वालामुखी धधकता 'स्वको अभी बचा लो
दूध की नदिया सोने चिड़िया से गुर सीखो
कल्पवृक्ष भारत अगाध है प्रेम लुटाना लेना सीखो
कदम ताल से धरती कांपी ................
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
प्रतापगढ़ भारत

कुल्लू -हिमाचल

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

सांप सरीखे घर के लोग ? चुनाव



(फोटो साभार गूगल/नेट से लिया गया )
हमारा हिंदुस्तान
भेंडिया धंसान
एक भेंड कुएं में कूदी की बस
कुवां भर गया
उनका काम हो गया
शातिर लोग कुछ को खिला पिला
माथे पे बलि का चन्दन लगा
हमारे ही बीच से अगुवा बना …
तालियों की गड़गड़ाहट
पराये मुंह मियाँ मिट्ठू बन
मूरख मंच से ‘मुन्ना” काका
तोते से पढ़ पढ़ा सीख आये
पंद्रह दिन कोशिश करते जोर लगाए
बेटा बहु बेटी को आंगन की चौपाल में
“एक” दिन रविवार को जुटा पाए
विकास गली हैण्ड पम्प चक रोड
रोड पुल स्कूल पंचायत भवन
मंहगाई डायन तक सब ने अंगुली उठाई
लेकिन जब एकजुट होने की
वोट देने की -न देने की बात आई
भ्रष्टाचार के मुद्दे पे बात आई
तो विजय चिन्ह वी की ऊँगली ना उठ पायी
एक एक कर सरकने लगे
सांप सरीखे  घर के लोग ?
जाते जाते मुन्ना को सुना गए …
कौन देगा कोचिंग टिउसन बिल्डिंग फीस
ब्लड प्रेशर सुगर डॉ आपरेशन की फीस
डीजल पम्प खाद मजदूरी लों
गिरता कच्चा घर रोटी तेल नोन
लैपटाप प्रोजेक्ट मोटर साईकल
चार पहिया दसियों लाख
निकम्मों की डिमांड है
दहेज़ के दानव का असर देखो
विक्षिप्त बेटी -…
पढ़ी लिखी ढांचा सी ….
घुटन से कैसे बीमार है
सिसकती बीबी उस और मुह फेर कर
आँसू टपकाते बैठ गयी
“मुन्ना” काका खुरपी पलरी लिए
दस विस्वा जमीन -दस प्राणी ….
जोर से साँस लेते भरते आह
ताकने लगे आसमान !!——–
सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
४.२५-५ पूर्वाह्न
कुल्लू यच पी
४.२.२०१२

सांप सरीखे घर के लोग ? चुनाव



(फोटो साभार गूगल/नेट से लिया गया )
हमारा हिंदुस्तान
भेंडिया धंसान
एक भेंड कुएं में कूदी की बस
कुवां भर गया
उनका काम हो गया
शातिर लोग कुछ को खिला पिला
माथे पे बलि का चन्दन लगा
हमारे ही बीच से अगुवा बना …
तालियों की गड़गड़ाहट
पराये मुंह मियाँ मिट्ठू बन
मूरख मंच से ‘मुन्ना” काका
तोते से पढ़ पढ़ा सीख आये
पंद्रह दिन कोशिश करते जोर लगाए
बेटा बहु बेटी को आंगन की चौपाल में
“एक” दिन रविवार को जुटा पाए
विकास गली हैण्ड पम्प चक रोड
रोड पुल स्कूल पंचायत भवन
मंहगाई डायन तक सब ने अंगुली उठाई
लेकिन जब एकजुट होने की
वोट देने की -न देने की बात आई
भ्रष्टाचार के मुद्दे पे बात आई
तो विजय चिन्ह वी की ऊँगली ना उठ पायी
एक एक कर सरकने लगे
सांप सरीखे  घर के लोग ?
जाते जाते मुन्ना को सुना गए …
कौन देगा कोचिंग टिउसन बिल्डिंग फीस
ब्लड प्रेशर सुगर डॉ आपरेशन की फीस
डीजल पम्प खाद मजदूरी लों
गिरता कच्चा घर रोटी तेल नोन
लैपटाप प्रोजेक्ट मोटर साईकल
चार पहिया दसियों लाख
निकम्मों की डिमांड है
दहेज़ के दानव का असर देखो
विक्षिप्त बेटी -…
पढ़ी लिखी ढांचा सी ….
घुटन से कैसे बीमार है
सिसकती बीबी उस और मुह फेर कर
आँसू टपकाते बैठ गयी
“मुन्ना” काका खुरपी पलरी लिए
दस विस्वा जमीन -दस प्राणी ….
जोर से साँस लेते भरते आह
ताकने लगे आसमान !!——–
सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
४.२५-५ पूर्वाह्न
कुल्लू यच पी
४.२.२०१२

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

भारत देश हमारा प्यारा


भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

(photo with thanks from google/net)
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तरह तरह की भाषाएँ हैं
भिन्न भिन्न है बोली
रहन सहन पहनावे कितने
फिर भी सब हमजोली
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन ......
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मन मिलते हैं गले मिलें हम
हर त्यौहार मनाएं
धूमधाम से हँसते गाते
हाथ मिलाये सीढ़ी चढ़ते जाएँ ..
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

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बड़े बड़े त्यागी मुनि ऋषि सब
इस पावन धरती पर आये
वेद ज्ञान विज्ञानं गणित सब
दुनिया योग  सिखाये ...
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

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आलस त्यागे बच्चे बूढ़े कर्म जुटे  हैं
हरियाली खुशहाली  देखो
घर घर में है ज्योति जगाये
लिए तिरंगा नापे धरती सागर चीरे
पर्वत चढ़ के आसमान हम छाये
चमक दामिनी सी गरजें जब
दुश्मन सब थर्राएँ
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

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कितने जालिम तोड़े हमको
लूटे - ले घर भागे
सोने की चिड़िया हम अब भी
देखो सब से आगे
जहां रहेंगे खिल जायेंगे
फूल से महके जाते
वे जलते कोयले सा बनते
हीरा हम सब चमके जाते
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .......

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वीर जवानों वीर शहीदों
शत शत नमन तुम्हे ,
तेरे ऋण से उऋण  कहाँ हे !
नक़्शे कदम पे तेरे जाके
है प्रयास हम प्रजा सभी का
झंडा ले हम विश्व पटल पे
भरे  ऊर्जा जोश दोगुना
ऊंचाई   चढ़ सूर्य से चमकें
पल पल हम गतिशील रहें !
भारत देश हमारा प्यारा
बड़ा अनोखा अद्भुत न्यारा
शत शत इसे नमन .....

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सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
करतारपुर पंजाब
२६ जनवरी २०१२
८-८.१५ पूर्वाह्न
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