शैतान ने ,
दुनिया के निरीक्षण का मन बनाया ;
साथ में एक-
एडीशनल को लेकर आया |
देखें कहाँ तक फ़ैली है-
शैतान की माया |
भूखा किसान ,
हल जोतकर थका थकाया ,
एकमात्र रोटी खोजाने पर भी -
न रोया चिल्लाया;
पानी पीकर , पुनः-
स्वयं को काम पर लगाया |
शैतान ने अपने दूत को हडकाया -
कहाँ है मेरा नाम,
कहाँ है मेरी माया ?
ऐसे तो होजायगा-
शैतान के नाम का सफाया |
यदि शीघ्र ही दुनिया में,
अनाचार नहीं फैला पायगा ;
तो रौरव नर्क की भीषण आग में,
झोंक दिया जायगा |
दूत ने कुछ समय माँगा,
सेवक बनकर किसान के घर आया |
इस बार बहुत वर्षा होगी ,
सेवक ने किसान को समझाया ;
उसने ढलान पर अन्न उगा कर -
भरपूर लाभ उठाया |
अगले वर्ष भी सेवक की सलाह से-
उसने खूब अन्नपाया ;
इसका क्या करें ,
किसान न समझ पाया |
तब सेवक ने उसे ,
मदिरा बनाने का उपाय बताया,
मदिरा पीना सिखाया |
दूत के आमंत्रण पर-
शैतान पुनः निरीक्षण पर आया ;
और किसान के यहाँ , पार्टी में-
शराव को पानी की तरह बहते पाया |
एक भृत्य शराव ढालते समय लडखडाया ,गिरा -
और जाम फर्श पर लहराया |
किसान ने भृत्य को मारा चांटा ,
दूत ने शैतान का ध्यान ,
यूं बांटा |
महामहिम...
एक मात्र रोटी के खोजाने पर ,
जो नहीं था घबराया ;
देखिये ,उसी ने -
एक जाम शराव पर यूं शोर मचाया |
पहला पैग पीते ही -
सभी आनंद से बौराये;
सभी ने अपनी अपनी शान में ,
अपने ही गुण-गीत गाये |
दूसरे गिलास् में , माहौल-
क्रोध और गुर्राहट से गर्माया ;
ये क्या चीज़ है,
और कैसे बनाई !
दूत ने बड़े गर्व से सीना फुलाया , बोला-
मैंने इसमें लोमड़ी, सूअर और भेड़िये का,
रक्त था मिलाया |
शैतान ने -
अपने दूत की पीठ को थपथपाया ;
अब होजायेगा , पृथ्वी से-
भगवान् के नाम का सफाया |
जब तक इंसान,
शराव पीता रहेगा ;
पृथ्वी पर,
शैतान के नाम का डंका -
बज़ता रहेगा ||
दुनिया के निरीक्षण का मन बनाया ;
साथ में एक-
एडीशनल को लेकर आया |
देखें कहाँ तक फ़ैली है-
शैतान की माया |
भूखा किसान ,
हल जोतकर थका थकाया ,
एकमात्र रोटी खोजाने पर भी -
न रोया चिल्लाया;
पानी पीकर , पुनः-
स्वयं को काम पर लगाया |
शैतान ने अपने दूत को हडकाया -
कहाँ है मेरा नाम,
कहाँ है मेरी माया ?
ऐसे तो होजायगा-
शैतान के नाम का सफाया |
यदि शीघ्र ही दुनिया में,
अनाचार नहीं फैला पायगा ;
तो रौरव नर्क की भीषण आग में,
झोंक दिया जायगा |
दूत ने कुछ समय माँगा,
सेवक बनकर किसान के घर आया |
इस बार बहुत वर्षा होगी ,
सेवक ने किसान को समझाया ;
उसने ढलान पर अन्न उगा कर -
भरपूर लाभ उठाया |
अगले वर्ष भी सेवक की सलाह से-
उसने खूब अन्नपाया ;
इसका क्या करें ,
किसान न समझ पाया |
तब सेवक ने उसे ,
मदिरा बनाने का उपाय बताया,
मदिरा पीना सिखाया |
दूत के आमंत्रण पर-
शैतान पुनः निरीक्षण पर आया ;
और किसान के यहाँ , पार्टी में-
शराव को पानी की तरह बहते पाया |
एक भृत्य शराव ढालते समय लडखडाया ,गिरा -
और जाम फर्श पर लहराया |
किसान ने भृत्य को मारा चांटा ,
दूत ने शैतान का ध्यान ,
यूं बांटा |
महामहिम...
एक मात्र रोटी के खोजाने पर ,
जो नहीं था घबराया ;
देखिये ,उसी ने -
एक जाम शराव पर यूं शोर मचाया |
पहला पैग पीते ही -
सभी आनंद से बौराये;
सभी ने अपनी अपनी शान में ,
अपने ही गुण-गीत गाये |
दूसरे गिलास् में , माहौल-
क्रोध और गुर्राहट से गर्माया ;
भेड़ियों की तरह चीख चीख कर -
सब ने अपना भयंकर रूप दिखाया |
अंतिम जाम,
जब वो आजमाने लगे,
तो नाली की कीचड में गिरकर -
सूअर की भांति हुर्राने लगे |
शैतान ने हर्षित होकर,
दूत को दी बधाई , कहा-ये क्या चीज़ है,
और कैसे बनाई !
दूत ने बड़े गर्व से सीना फुलाया , बोला-
मैंने इसमें लोमड़ी, सूअर और भेड़िये का,
रक्त था मिलाया |
शैतान ने -
अपने दूत की पीठ को थपथपाया ;
अब होजायेगा , पृथ्वी से-
भगवान् के नाम का सफाया |
जब तक इंसान,
शराव पीता रहेगा ;
पृथ्वी पर,
शैतान के नाम का डंका -
बज़ता रहेगा ||