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शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

सोशल मिडिया से युद्ध का ऐलान करते महारथी (social Media War)

#War #युद्ध
◆ दृश्य एक: 24 दिसम्बर 1999 को इस्लामिक आतंकवादियों ने  में इंडियन एयरलाइंस फ्लाईट 814 का
आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया और उसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए.. 178 यात्री थे जिसमें से एक यात्री रूपीन कत्याल विरोध करने के कारण मारा गया. बाकी 177 मुसाफिरों ने भारीे हथियारों से लैस आतंकियों का कोई विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई..

◆ दृश्य दो:  मुसलमान आतंकवादीयों ने ग्यारह सितम्बर 2001 अमेरिका में ट्वीन टावर आतंकवादियों ने उड़ाया..यात्रियों से भरे एक हाइजैक जहाज को आतंकवादी व्हाइट हाउस की ओर ले जा के तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश के आवास पर गिराना चाहते थे मगर यात्रियों ने आतंकियों से लड़ाई की.काकपिट तक पहुचता देख "अल्लाह हूँ अकबर के नारे के साथ" मजबूरी में आतंकियों को विमान पहले गिराना पड़ा. सभी यात्री मारे गये..सभी आतंकी मारे गए।।व्हाइट हाउस सुरक्षित रहा..

◆ दृश्य तीन: आतंकवादी अयूब_अल_खज्जानी ने एम्स्टर्डम से पेरिस जा रही एक हाई स्पीड ट्रेन में एक47 और बमो से लैस होकर हमला किया। ट्रेन में यात्रा कर रहे अमरीकी एंथोनी सालडर, एलेक स्कारलाटोस और स्पेंसर स्टोन ने इस्लामिक आतंकवादी #अयूब_अलखज्जानी से ट्रेन में भिड़ गए और आतंकवादी को धर दबोचा..इस गोलाबारी में दर्जनों की जान जा सकती थी मगर तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए..

◆दृश्य चार:पुनः कांधार हाइजैक से सम्बंधित है..विमान अपहरण के बाद यात्रियों के परिजनों की इकट्ठा भारी भीड़। सभी का कहना था की किसी भी कीमत पर उन्हें उनके परिजन जीवित चाहिए एक की भी जान अब नहीं जानी चाहिए..सरकार चाहे आतंकी छोड़े या वार्ता करे सेना भेजे या कोई भी कीमत दे मगर कोई भी मरना नहीं चाहिए..अंततः अटल बिहारी वाजपेयी ने कांग्रेस समेत सभी दलों की सहमति से 3 खूंखार आतंकवादियों को छोड़ा और सभी यात्री वापिस आये..

◆ दृश्य पांच: वर्तमान का दृश्य...भारत में हुए पठानकोट आतंकी हमले के बाद हम सब सोशल मिडिया से युद्ध की घोषणा कर रहे है..मैं सन 1999 के पुराने आर्काइव वीडियो खंगाल रहा हूँ जिसमे विमान हाइजैक में फसे यात्रियों के परिवारों के कुछ लोग ये कहते मिल जाए  "मरते हैं परिजन तो मरने दो मगर आतंकवादियों को रिहा करके घुटने मत टेको..हमें परिजनों से प्यारा हमारा देश है.."
कई घंटो की खोज के बाद ऐसा वीडियो मिल नहीं पाया...आप में से किसी को मिल जाए तो जरूर भेजिएगा..मुझे वो वीडियो Narendra Modi के पास भेजकर उनको याद दिलाना है की हम लोग सिर्फ फेसबुक से तोप नहीं चलाते, आप युद्ध कीजिये विपत्ति काल में  सैनिको के साथ साथ हम आम भारतीय भी अपने परिवार समेत मरने को तैयार थे.

आशुतोष की कलम से
https://www.facebook.com/ashutoshkikalam

ट्वीट :   @ashu2aug 

शनिवार, 13 जुलाई 2013

कुत्ते की मौत पर युद्ध


किसी इंसान के मौत पर युद्ध हो सकता है और कुत्ते की मौत पर भी । लेकिन अगर कुत्ते की मौत काल्पनिक हो तो भी युद्ध हो सकता है, ये आप पहले बार देख रहे होंगे । दरअसल नरेंद्र मोदी ने लंदन की एक पत्रिका को दिये इंटरव्यू मे ये कहा की अगर आप गाड़ी मे पीछे बैठे हों और आपकी गाड़ी से कोई कुत्ते का पिल्ला कुचल जाए तो भी दुख होता है। बस फिर क्या था राजनैतिक गलियारों मे और लगभग सभी टीवी चैनलो पर वाक युद्ध शुरू हो गया। तरह तरह के भावार्थ निहातार्थ निकले जाने लगे ।  
मोदी का इशारा शायद यह है की गैर इरादतन, अनजाने मे बिना उनकी किसी प्रत्यक्ष  गलती के गुजरात दंगों मे मारे गए लोगो की मौत का उन्हे दुख है। कहा तो ये भी जाता है की चीटी के मरने का भी दुख होता है। अच्छा होता की इस तरह के उदाहरण से वे बचते। तब शायद उनके विरोधी इंटरव्यू की किसी और बात का बतंगड़ बना देते जैसा की उनके हिन्दू राष्ट्रवाद के बयान को लेकर मचाया जा रहा है। मुझे लगता है की उनके फालोवेर्स मे विरोधी दल के भी काफी नेता है जो उनकी हर बात और हर गतिविधि  को बड़े ध्यान से देखते है और अपने दल के अनुकूल तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते है । इसमे उनके वोट  बैंक का तुष्टीकरण सदैव छिपा रहता है। इसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को ये हो रहा है कि मोदी की हर बात मीडिया मे बड़े ज़ोर शोर से छा जाती है और विरोधी नेताओं की कुंठा इस तरह सामने आती है कि उनकी बौद्धिकता और स्वभावगत असलियत जनता के सामने आ जाती है । लेकिन इससे दो समुदायों के बीच की खाई और चौड़ी होती जा रही है । शायद यही ये नेता चाहते हैं क्योकि इससे वोट बैंक का ध्रुवीकरण होगा और एक समुदाय विशेष के वोट थोक मे उसे मिलेंगे। अगर मोदी चाहें भी तो सीधे अफसोस भी जाहिर नहीं कर सकते क्योकि तब तथाकथित धर्म निरपेक्ष दल इसे उनकी दंगों की स्वीकारोक्ति के रूप मे प्रचारित करेंगे ।
मुस्लिम समुदाय को भी ये सोचना होगा कि उनका हित कहाँ और कैसे होगा और उन दल और नेताओं से दूर रहना होगा जो उन्हे सिर्फ वोट बैंक बनाए रखना चाहते हैं ।             

 

शिव प्रकाश मिश्रा
http://lucknowcentral.blogspot.in/