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बुधवार, 18 मई 2011

किसने बनाया ?'...कविता ...डा श्याम गुप्त....

तत्वदर्शी कहते हैं ,
कण कण में भगवान -
सब कुछ भगवान ने बनाया है |
विज्ञान कहता है-
परमाणु ही सभी का मूल है ,
सब कुछ स्वत: बन गया,
हमने आपने मनुष्य ने -
सब कुछ बनाया है |
चलिए  , विज्ञान की मान लेते हैं |
ईश्वर  प्रकृति  विज्ञान -
तो सब मनुष्य ने बनाया है |
फिर झंझट काहे का ,
झगड़ा क्यों -
जिसे जो मानना है, माने-
ईश्वर ने बनाया , या-
स्वत: बन गया |
'एको सद विप्रा: बहुधा वदन्ति ' |
मस्त रहो ,
खुश रहो,
दूसरे को दुःख न दो ;
कर्म पथ  पर चलते रहो,
सत्य वही है चाहे जैसे कहो ||

ये सामान्य जन की बातें हैं , पर -
ज्ञानी जन कहाँ मानते हैं;|
फिर फिर उसी प्रश्न को तानते हैं --
'तो मनुष्य किसने रचाया ?"
विज्ञान कहाँ से आया ?
परमाणु किसने बनाया ?'
इंसान घूम फिर कर फिर वहीं आया -
इंसान ईश्वर ने बनाया ,या--
ईश्वर इंसान ने बनाया !
कौन है ईश्वर, कौन हैं माया !
यही वह रहस्य है , जो--
आज तक समझ न आया,
इसी को कहते हैं --
ईश्वर और ईश्वर की माया ||