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सोमवार, 28 अगस्त 2017

पत्रकार प्रेस क्लब (पीपीसी) की प्रदेश स्तरीय बैठक सम्पन्न


पत्रकार प्रेस क्लब (उत्तर प्रदेश) की प्रदेश स्तरीय बैठक आज दिनांक 27ध्08ध्17 को वाराणसी स्थित वाराणसी के जिलाण्यक्ष पवन पाण्डेय के आवास शिवम पैलेस पर सम्पन्न हुई। बैठक के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम पाठक रहे तथा अध्क्षता क्लब के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष हरीश सिंह ने की। 
कार्यक्रम का शुभरम्भ वरिष्ठ पदाधिकारियों के माल्यर्पण व स्वागत के उपरान्त हुआ। 

पत्रकार प्रेस क्लब की उत्तर प्रदेश इकाई के समस्त पदाधिकारिगण जिसमे प्रदेश, मंडल एवम सभी जिलों के पदाधिकारियों के औपचारिक स्वागत सत्कार, आपसी परिचय, अतिथियों के उदबोधन के बाद , हिंदुस्तान समाचार पत्र के छायाकार स्व0 विजय यादव जी की असायमिक निधन पर शोक प्रकट करते हुए 2 मिनट का मौन रखकर उनकी दिवंगत आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की गई। उसके उपरांत संगठन की रीति नीति, वर्तमान में पत्रकार जगत के हितार्थ किये जा रहे उल्लेखनीय कार्य, पत्रकार जगत के भविष्य एवं पत्रकारों और उनके परिवार की सुरक्षा हेतु विस्तृत चर्चा की गई। 

प्रदेश अध्यक्ष श्री घनश्याम पाठक जी द्वारा कई नवागत पत्रकारों की जिज्ञासा को सरल तरीके से जानकारी देते हुए संतुष्ट किया गया। इस अवसर पर संगठन के समस्त पदाधिकारी एवम कई विशिष्ट सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक का आयोजन जिला अध्यक्ष वाराणसी श्री पवन पांडेय जी द्वारा किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीपीसी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री हरीश सिंह जी के साथ मंच संचालन प्रदेश अध्यक्ष श्री घनश्याम पाठक जी द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री घनश्याम पाठक जी ने पत्रकारों से जुडी कई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, पत्रकारों के हित एवम सुरक्षा के लिए कई सुझाव एवं उपाय निर्देशित किये। पत्रकार साथियों को हर सम्भव सहायता का भरोसा दिलाने के साथ ही उन्होंने ऐसे पत्रकारों को सलाह एवम चेतावनी भी दी की कोई भी साथी अपने व्यक्तिगत स्वार्थों या दुर्भावनाओं से ग्रसित होकर पत्रकारिता या संगठन का उपयोग करने की कोशिश ना करे।
प्रदेश अध्यक्ष जी के साथ बैठक में मौजूद प्रदेश संयोजक श्री विनय मौर्या जी, प्रदेश उपाध्यक्षगण श्री हरीश सिंह जी, श्री संतोष पांडेय,श्री कृष्ण कुमार द्विवेदी, श्री सोनू सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री श्री मदन मोहन शर्मा, पूर्वांचल प्रभारी श्री प्रवीण यादव(यश), प्रदेश सचिव श्री गौरव शुक्ला जी ने जिलेवार सभी पदाधिकारियों एवम सदस्यों की समस्याओं एवम उनकी सलाह पर विचार विमर्श किया।
बैठक में कई वक्ताओं ने अपना अपना मत और विचार मंच पर लघु वाक्यों में प्रस्तुत किया। ऐसे ही वक्ताओं की कड़ी में प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सोनू सिंह द्वारा पंचकुला में हुई वीभत्स घटना में मीडियाकर्मियों के साथ हुए हिंसक व्यवहार को देखते हुए समाचार संकलन करते समय स्वयं की सुरक्षा का पूरा ध्यान देने की सलाह दी। जिलाउपाध्यक्ष जौनपुर अखिलेश सिंह जी में कहा कि संगठन के प्रत्येक सदस्य सबको एक परिवार के रूप लेकर चलना होगा तभी संगठन का सही अर्थ होगा। इसी तरह पीपीसी यूपी के प्रदेश संयोजक श्री विनय मौर्या जी, पूर्वांचल संयोजक श्री प्रवीण यश जी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सन्तोष पांडेय जी, समेत संगठन कई के सदस्यों एवम पदाधिकारियों द्वारा पत्रकार हित के अपनी बातें रखीं।
इस प्रादेशिक बैठक में प्रदेश अध्यक्ष जी श्री घनश्याम पाठक जी के साथ संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री श्री मदन मोहन शर्मा जी, वाराणसी मंडल अध्यक्ष श्री पवन त्रिपाठी जी, मंडल अध्यक्ष मिर्जापुर श्री राहुल सिंह जी,जिला संरक्षक वाराणसी श्री सकल देव सिंह जी, जिला उपाध्यक्ष वाराणसी श्री नवीन प्रधान जी  जिला अध्यक्ष चंदौली श्री आशुतोष तिवारी जी, जिला संयोजक चंदौली श्री मुकेश मौर्या जी, जिला अध्यक्ष जौनपुर श्री कृपाशंकर यादव जी,जिला संयोजक जौनपुर
 श्री लालचंद निषाद जी, जिला संयोजक भदोही श्री 
समीर वर्मा जी, आशीष सोनी जी, रामलाल साहनी जी, 
संजीव शर्मा चंद्रप्रकाश तिवारी, अनूप शुक्ला, विक्रम 
मल्होत्रा, रेवती रमण शर्मा, नीरज कुमार मौर्या, 
उमेश कुमार उपाध्याय, उपेंद्र कुमार यादव, कैलाश 
प्रसाद साहनी, दिनानाथ, राजेंद्र प्रसाद सिंह, पुष्कर मिश्र, 
सुधीर कुमार विश्वकर्मा, संजीव शर्मा, विवेक कुमार,
 गोविंद कुमार श्रीवास्तव, दिलीप कुमार मौर्या,
 मिथिलेश कुमार सिंह, चंद्र प्रकाश तिवारी, प्रभु नारायण प्रजापति, जितेंद्र कुमार अग्रहरि, आनंद चतुर्वेदी, मदन मोहन मिश्रा, योगेश श्रीवास्तव, डॉक्टर बीपी यादव, आशीष भूषण सिंह, मनीष तिवारी, प्रभात रस्तोगी, अरुण पटेल, संतोष सिंह, राजीव सेठ, अमरदीप, राजकुमार, केएल शाही, मुकेश मिश्रा, धर्मेंद्र पांडेय, पिंकू सरदार, कृष्णकांत मिश्रा, अभिनव कुमार पांडेय, वीरेंद्र पांडेय, पंकज पांडेय, संजय कुमार मिश्रा, राजेंद्र कुमार पांडेय, राजेश कुमार मिश्र, अवनीश कुमार दुबे, संतोष कुमार दुबे, मुहम्मद जावेद, ओम प्रकाश,  दिलीप सिंह, भरत निधि तिवारी, सुरेंद्र सिंह, वली अहमद, रामकृष्ण पांडेय, शुभम सिंह, दीपक तिवारी, सुनील प्रजापति, रामाज्ञा यादव, शशिकांत मौर्य, कमलेश यादव, राजेश मिश्र, गुलजार अली, विनोद कुमार सिंह, अजीत सिंह, संतोष नागवंशी, मोहम्मद इरफान हाशमी, मंजीत कुमार पटेल, बजरंगी प्रसाद, कृष्णा सिंह, विवेक यादव, विकी मध्यानी, पंकज कुमार पांडेय, रामलाल साहनी, महेश कुमार मिश्रा समेत सैंकड़ो पत्रकार साथी पुरे जोश के साथ शामिल हुए। 




गुरुवार, 26 जनवरी 2012

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश है आचार संहिता

{इस लेख के माध्यम से हम आचार संहिता पर अंगुली नहीं उठा रहे है, बल्कि जो हम देख और महसूस कर रहे है वही व्यक्त कर रहे है.}
बचपन में जब हम गाव में रहते थे और चुनाव का दौर आता था तो हम खुश हो जाते थे. जब कोई प्रचार वाहन आता तो हम बच्चे बड़े खुश हो जाते. हमें झंडा और पोस्टर मिल जाता था, हम लोग झंडा हाथ में लेकर एक टोली में गाव में घूमा करते. हमें याद है उस समय नारे लगाकर घूमना बड़ा अच्छा लगता था, खूब मस्ती होती, फिर मुख्य चुनाव टी.एन. शेषन बने उन्होंने फिजूल खर्ची पर काफी रोक रोक लगा दी, वहा तक सबकुछ ठीक था. किन्तु इस बार जो हालात बने है. वह मेरी खुद की राय में कही से भी उचित नहीं है. चुनाव में व्याप्त भ्रष्टाचार और फिजूल खर्ची रोकने के नाम पर लोंगो को डराया जा रहा है. बेवजह लोंगो को परेशां किया जा रहा है. और यह सब कुछ चुनाव में पारदर्शिता लाने के नाम पर हो रहा है. और सब चुप्पी साधे पड़े है. आचार संहिता की हनक ऐसी की कोई जुबान नहीं खोल रहा कही मुकदमा न दर्ज हो जाय.
भले ही लोग कह रहे है की ऐसे ही होता रहा तो एक आम आदमी भी चुनाव लड़ सकता है.. जबकि आम और इमानदार व्यक्ति को चुनाव में रोकने के लिए एक गहरी साजिस रची जा रही है.... मैं मीडिया से जुडा व्यक्ति हूँ और अभी तक मुझे ही नहीं पता की कितने प्रत्यासी हमारे जनपद से चुनाव लड़ रहे है, हो सकता है सभी का परचा दाखिल हो जाय उसके बाद पता चल जाय पर सभी के चुनाव चिन्ह याद रखना तो बहुत ही मुश्किल है. आज किसी आम आदमी से पूछा जाय की कितने चुनाव चिन्ह उसे याद है तो  शायद बमुश्किल चार या पार्टियों के चुनाव चिन्ह उसे याद रहेंगे,  छोटे दलों के प्रत्यासी अपनी पहचान भी नहीं बता पा रहे हैं. सोचना यह है की जो अपनी पहचान नहीं बता पा रहा है, वह मतदाताओ को कैसे समझा पायेगा. पूरा चुनाव उसे अपना परिचय देने में ही बीत जायेगा. क्या ऐसा नहीं हो सकता की बड़े दलों और चुनाव आयोग की यह मिलीजुली साजिश हो ताकि छोटे दल और निर्दल प्रत्यासी चुनाव लड़ने की जुर्रत भी नहीं कर पाए.
देखा जा रहा है की हर व्यक्ति आज खुद को डरा हुआ महसूस कर रहा है. कही भी सार्वजानिक स्थल पर किसी दल का नाम लेने से भी घबरा रहा है. किसी का झंडा अपने मकान पर लगाने से डर रहा है. चारो तरफ एक अजीब सी  ख़ामोशी व्याप्त है और लोग इश्वर से प्रार्थना कर रहे है की जल्दी से चुनाव बीत जाय... व्यापारी वर्ग व्यापर के सिलसिले में पैसा लेकर जाने से डर रहा है. यहाँ तक की बैंक की वैन भी पिछले दिनों पुलिसे ने रोक ली., करीब चार माह पूर्व भदोही में पीस पार्टी की रैली हुयी थी, आचार संहिता लागू होते ही प्रशासन ने सार्वजानिक स्थलों पर लगे झंडे बैनर हटवा लिए... इत्तफाक से एक झंडा टेलीफोन के खम्भे पर रह गया था, एक फुट का यह झंडा धुप और पानी से गल गया था, पर उसे उतार कर डॉ.अयूब के ऊपर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया. वाराणसी रोड के एक पेड़ पर रैली के समय का ही फ्लेक्स लगा था, चौरी पुलिस ने उसका भी मुकदमा दर्ज कर लिया. यहाँ तक की जनपद के लगभग हर प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चूका है. जिसमे ९० प्रतिशत ऐसे मामले है जिसे देखकर हंसी भी आती है. आचार संहिता के नाम आम आदमी को डराया जा रहा है.
मिडिया पर अंकुश लग चुका है. खैर इस मामले में मैं मिडिया को ही दोषी मानता हूँ. पेड न्यूज़ के कारण मिडिया ने जो किया था. उसका खामियाजा तो उसे भुगतना ही था. पैसे लेकर गलत खबरे छापने से ही मिडिया की गरिमा गिरी है. लगभग सभी अख़बार पैसे वाले प्रत्यासियो की रखैल बन चौके है. और इसका खामियाजा वे पत्रकार उठा रहे है. जो निष्पक्ष होकर खबरे लिखना चाहते है पर उन्हें मौका नहीं मिल रहा है. हाथ पैर बांध दिए गए है.
निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाये गए कदम सराहनीय है., पर जिस आचार संहिता के चलते किसी की रोज़ी रोटी छीन जाय, व्यवसायियों एवं आम आदमी में भय व्याप्त हो, लोग खुलकर अपनी बात न कर सके. सच की आवाज़ दबा दी जाय,  अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगे. प्रशासन निरंकुश होकर मनमानी करे. ऐसी आचार संहिता का औचित्य कम से कम मुझे तो समझ में नहीं आ रहा .