मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

लोक: (Lokas, Different Galaxies in the Universe)

हमारा ग्रह एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन का संभव होना 'ज्ञात' है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि और किसी ग्रह पर जीवन है ही नहीं.
सृष्टि में प्रत्येक गैलेक्सी में अरबों-खरबों ग्रह हैं, प्रत्येक ब्रह्माण्ड में अरबों-खरबों गैलेक्सियां हैं,और आकार क्षेत्र में अरबों-खरबों ब्रह्माण्ड हैं.
अगर हम असंख्य ब्रह्मांडों को एक बार भूल भी जायें, तो ऐसे बहुत से ग्रह हमारे 'अपने ब्रह्माण्ड' में ही हैं जिन पर जीवन संभव है, और जहां एलियन प्रजातियाँ पाई जाती हैं.
यहाँ मैं अपने पसंदीदा लेखक Arthur C. Clarke का एक कथन बताना चाहूँगा:
"Almost certainly there is enough land in the sky to give every member of the human species, his own private world! But how many of those potentially habitable worlds are ALREADY inhabited, we have no way of knowing!
Yet, as he quite eloquently states, the barriers of distance are crumbling; one day SOON we may meet our Equals, or our Masters, among the stars. "

"निश्चित तौर पे अंतरिक्ष में लगभग  इतना पर्याप्त स्थल मौजूद है कि प्रत्येक इंसान को उसकी अपनी एक दुनिया दी जा सकती है. लेकिन उनमें से कितने उस संसार में बसने कि क्षमता रखते हैं जो पहले से बसे हुए हैं, ये जानने का कोई तरीका नहीं है. लेकिन जिस तरह से दूरियों की बाधाएं दूर हो रही है हम जल्द ही दुसरे ग्रह पर रहने वाले उन लोगों से मिलेंगे जो हमारी ही तरह हैं या फिर हमारे भी स्वामी हैं."

हमारी वर्तमान स्थिति:


दुर्भाग्यवश मानव प्रजाति आज कुएं का मेढक बनी हुयी है. लम्बे समय से हम ब्रह्माण्ड के अतिअल्प् ज्ञान में फंसे हुए हैं.इसलिए हम ये भूल जाते हैं कि हमारे कुएं के बाहर भी एक महान दुनिया है.
बाहर बहुत से सौर मंडल , गैलेक्सी और ब्रह्माण्ड हैं.और याद रखने वाली बात कि हमारे अलावा भी अन्य ग्रहों पर जीवन है.
आईये हम अपनी यात्रा की शुरुवात ब्रह्माण्ड में अपनी मौजूदा स्थिति के साथ करते हैं:
हमें ये एहसास हो जाता है के इस विशाल ब्रह्माण्ड में हम कितने नगण्य सूक्ष्म हैं.और बाहर जो असंख्य ग्रह हैं उनकी हमें तनिक भी जानकारी नहीं है।
इस विडियो में आपको हमारी गैलेक्सी-मिल्की वे (Milky Way) या शिशुमार दिखाई दी होगी।


Milky-Way: Our Galaxy



भारतीय दर्शन के अनुसार ब्रह्माण्ड की संरचना:

ये हमारा सौभाग्य है कि हमारे पूर्वज हमारी तरह कूप मण्डूक, अल्पज्ञानी और सीमित विज्ञानी नहीं थे. और उन्होंने ग्रहों नक्षत्रों और बहुल-ब्रह्मांडों का वर्णन हमें लिखित रूप में दिया है। बहुल-ब्रह्माण्ड को विज्ञान में Multiverse कहते हैं और एक कोष में सभी ब्रह्मांडों के उपस्थित होने को Omniverse कहते हैं.
जैसे कि पिछली पोस्ट "सृजन" में बताया था सृष्टि में 2 क्षेत्र हैं: आध्यात्मिक क्षेत्र (Spiritual Realm) और आकार क्षेत्र (Material Realm).आध्यात्मिक क्षेत्र (Spiritual Realm) सभी शुद्ध आत्माओं का घर है जो वैकुण्ठ ग्रह पे रहती हैं और आकार क्षेत्र (Material Realm) में बहुत सारे ब्रह्माण्ड होते हैं जिनमें से एक हमारा ब्रह्माण्ड भी है।
पुराण ने हमारे ब्रहमांड को तीन विभिन्न लोकों में वर्गीकृत किया है:
१.उर्ध्व लोक (Highest Realm)
२.मध्य लोक (Middle Realm)
३.अधो लोक (Lowest Realm)

विभिन्न ग्रन्थ बहुत से लोकों की बात करते हैं. महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन अपने कर्तव्यों से पथभ्रमित हो गए थे तब कृष्ण ने उन्हें दिव्य दृष्टि प्रदान की, जिस से अर्जुन को भगवान् के विराट रूप के दर्शन हुए.
भगवान् के इस रूप में अर्जुन को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रूप दिखाई दिया. भगवान् के सिर से पाँव तक अर्जुन को 14 नक्षत्रिय विमाओं के दर्शन हुए.
प्रत्येक नक्षत्रिय तंत्र एक गैलेक्सी होती है।
Virat Roop of Lord Krishna

आइये हम इस 14 गैलेक्सी तंत्र को समझने की कोशिश करते हैं और इनके भौगोलिक एवं अन्तरिक्ष व्यवस्था को भी जान ने की कोशिश करेंगे.
प्रत्येक ब्रह्माण्ड अंडाकार होता है और इसमें तीन लोक एवं 14 नक्षत्रिय तंत्र होता है. और इसके नीचे 28 नर्क होते हैं.
  • ऊर्ध्व लोक देवी-देवताओं,आत्माओं,पितरों का निवास स्थल है.
  • मध्य लोक मानवों, पशु,पक्षियों,वनस्पतिओं का निवास स्थल है.
  • अधो लोक असुरों और नाग का निवास स्थल है.
हम सभी मध्य लोक में हैं. उर्ध्व और अधो लोक में 14 गैलेक्सीयाँ  इस प्रकार हैं:
उर्ध्वलोक     अधोलोक
सत्यलोक  1  अताल
तपोलोक   2  विताल 
जनलोक   3  सुताल
महर्लोक    4  रसताल 
स्वर्गलोक  5  तलाताल  
भुवर्लोक   6  महाताल   
भूलोक     7  पाताल
ये सभी ग्रह देवी दुर्गा के नियंत्रण में हैं अत: सृष्टि को देवी धाम भी कहा जाता है।

मानव शरीर में ब्रह्माण्ड का रूप:

ऊपर दिखाई गयी हमारी गैलेक्सी की आकृति पर आपने ध्यान दिया होगा। कुंडली के आकार की इस रचना को शिशुमार कहते हैं।शिशुमार का वर्णन जापानी टेक्स्ट्स में एक विशेष प्रकार के ड्रैगन के रूप में आता है जो अपनी ही पूंछ को खा रहा है।


Shishumar/Ouroboros/Dragon

ऋषियों ने प्रत्येक गैलेक्सी की तुलना Spinal Cord में स्थित विभिन्न कुंडलिनियों से की है। ध्यान योग से एक मनुष्य इन कुंडलियों की शक्तियों को जगा सकता है और इन कुंडलनी के जाग्रण से मानव मन का उर्ध्व रूपांतरण होता है।
अभी तक सभी कुंडलिनी चक्रों को जगाने में सफल सिर्फ एक व्यक्ति हुआ है जिनका नाम है गौतम बुद्ध।

Kundalini rising through the Chakras

रोचक बात है की बिलकुल ऐसा वर्णन जैन ग्रन्थ भी करते हैं। जैनों के पवित्र चिन्ह 'लोक-पुरुष' के भी वैसे ही तीन भाग होते हैं उच्च लोक,मध्य लोक और निम्न लोक।
जैन पंथ के अनुसार लोक पुरुष के सिर में दिव्य लोकों की एक श्रेणी होती है जहां पे खुशहाली और आनंद है ,मध्य में मानव और जंतु हैं और लोक पुरुष के पैर में 7 नरकों का क्रम होता है।

Lokas in Jain cosmology


उर्ध्व लोक:

सत्यलोक:
रचियता ब्रह्मा का निवास स्थल है।

Satya-Loka or Brahma-Loka

तपोलोक:
चारों चिरकालिक कुमारों का निवास स्थल।ये कुमार ब्रह्मा के बनाये हुए हैं जिनके नाम हैं-सनत, सनक, सनंदन और सनातन।

The Kumars preaching Supreme Knowledge

जनलोक:
दिव्य सिद्धियों युक्त मुनियों का निवास स्थल
महर्लोक:
ये भी ऋषियों मुनियों का निवास स्थल है किन्तु यहाँ पे रहने वाले ऋषियों के पास जन लोक के ऋषियों से थोड़ी कम सिद्धियाँ हैं।

Sages of Jana-Loka and Mahar-loka worshipping the Lord

स्वर्गलोक:
33 देवताओं का निवास स्थल। प्रत्येक देवता को ब्रह्माण्ड ने सञ्चालन का एक विशेष कार्य सौंपा गया है .जैसे इन्द्रों को वर्षा का नियंत्रण और  वरुण को वायु का नियंत्रण करने का कार्य दिया गया है।

The Heavenly Realm

भुवर्लोक:
ये लोक हमारे सौर मंडल के सन्दर्भ में है, 5 मुख्य  ग्रह और सूर्य देवता एवं 2 और मंडल ध्रुव व सप्त ऋषि।
ध्रुव (Polar Star) हमारे गैलेक्सी शिशुमार का केंद्र है और इसके घुर्णन से सारे तंत्र का घूर्णन नियंत्रित  होता है।

Pole Star is the center of our Galaxy-Shishumar(Milky-Way)
हमारी पृथ्वी पूर्णतया उर्ध्व होने के बजाये ध्रुव की दिशा में हलकी सी झुकी होती है।
पृथ्वी इसी झुकाव के कारण उतरी ध्रुव पे सर्दियों के समय 6 महीने रात और गर्मियों के समय 6 महीने दिन होता है।
Earth is tilted towards Pole star
सप्त ऋषि और ध्रुव को हम पृथ्वी से भी देख सकते हैं।

Sapta-rishi Loka revolves around the Pole Star

सूर्य अपनी अक्ष पे भी घूर्णन गति करता  है साथ  ही साथ एक और प्रकार की गति करता है।सूर्य का पथ 6 महीनों के लिए बाहय धुरी पे होता है और 6 महीनों के लिए अंत: धुरी पे होता है ,इसी की वजह से सर्दी और गर्मी का चक्र चलता है।सूर्य की इस गति को उत्तरायण और दक्षिणायन कहते हैं।

Uttarayan and Dakshinayan motion of sun is responsible for summer and winter cycle


मध्यलोक

भूमंडल में निम्न सात लोक होते हैं जहां मरणशील जीवों का जन्म होता है।यहाँ ब्रह्माण्ड को विशाल समुद्र की तरह माना गया है जिसमें विभिन्न ग्रह द्वीप की तरह हैं।उनमें से हमारा ग्रह पृथ्वी भी जम्बुद्वीप के नाम से जाना जाता है।जम्बुद्वीप समेत सात ग्रह इस प्रकार हैं।
  1. जम्बू-द्वीप
  2. प्लक्ष -द्वीप
  3. सल्माली -द्वीप
  4. कुषा -द्वीप
  5. क्रौंचा -द्वीप
  6. शक -द्वीप
  7. पुष्कर -द्वीप
जम्बू द्वीप पर भारत वर्ष है और उसमें भारत खंड में हम रहते हैं।
मध्यलोक में हमारी पृथ्वी के अलावा 6 अन्य ग्रहों पर भी जीवन बसा करता है।

अधोलोक

पृथ्वी से 70000 योजन निचे अधोलोक है जिसे बिला-स्वर्ग भी कहते हैं।ये संसार इस प्रकार हैं:
  1. अताल
  2. विताल 
  3. सुताल
  4. रसताल 
  5. तलाताल  
  6. महाताल   
  7. पाताल
इन ग्रहों पे दैत्य, दानव, पनी, निवत कवच, राक्षस, कालकेय, नागा, उरग रहते हैं। जो भोग की सभी वस्तुयों से  युक्त एक नकली स्वर्ग में रहते हैं यहाँ कोई आध्यात्मिक अस्तित्व नहीं है।

Rakshas denizens enjoy all Material opulences

ग्रंथों में 8 नाग राजाओं का जिक्र है - वासुकी, तक्षक, नंदा, उपनंदा, सागर, बलवान, अनावाताप्ता और उत्पा।इन्ही आठों का वर्णन जापानी और चाइनीज टेक्स्ट में भी 8 ड्रैगन के रूप में है।

नरक लोक:

भौमिक ग्रहों पे किये गए बुरे कर्मों की सजा के लिए नरक लोक में 28 विभिन्न प्रकार के नरक हैं:
रौरव, सुकर, रोध, ताल, विश्सन, महाज्वाल, तप्ताकुम्भ, लावन, विलोहित, रुधिरामभ, वैतरणी, कृमिश, कृमिभोजन, असिपत्रावना, कृष्णा, लालाभाक्षा, दारुण, पुयुवः, पाप, वह्निज्वाल, अधह्शिरा, संदंश, कल्सुत्र, तामस, अविची, स्वभोजन, अप्रतिष्ठित  और  अप्रची .

The different Hells


ये सभी नरक सूर्य पुत्र यमराज की अध्यक्षता में रहते हैं और उनकी अदालत में आत्माओं के पापों  के अनुसार सजा तय की जाती है।


Yamraj in his Court of Justice 

 

इन ग्रहों के निचे गर्भोदक सागर है जिस से एक ब्रह्माण्ड का निचला आधा हिस्सा भरा होता है।
और यहीं अनंत पे लेटे हुए हैं सर्वशक्तिमान भगवान् विष्णु।

रविवार, 9 दिसंबर 2012

मुकदमा, सियासत और फजीहत

( “पोल इंडिया ” राजनीतिक पत्रिका के दिसबंर अंक में प्रकाशित लेख) मंगल यादव यूपी सरकार की फजीहत कम होने का नाम नही ले रही है। यूपी की अखिलेश सरकार के कई फैसलों की विपक्ष से लेकर कोर्ट तक आलोचना हुई है। चाहे कई राजनेताओं के मुकदमें वापस लेने की बात हो या फिर कुछ महत्वपूर्ण जगहों पर विस्फोट के आरोप में जेल में बंद आरोपियों पर से मुकदमें वापस लेने की बात हो किसी औऱ मामलों में फैसले लेने की अखिलेश सरकार की किरकरी हुई है। अभी हाल में ही 22 नवबंर को यूपी सरकार की इलाहाबाद हाईकोर्ट में किरकिरी हुई। सात मार्च 2006 में वाराणसी के संकटमोचन मंदिर, दशाश्वमेघ घाट, कैंट रेलवे स्टेशन और दिसबंर 2007 को रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले मामले को वापस लेने के विरोध में याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अखिलेख सरकार की जमकर लताड़ लगाई। कोर्ट ने तंग लहजे में कहा कि आज आप मुकदमें वापस ले रहे हैं कल पद्मश्री भी देंगे। वाराणसी ब्लास्ट मामले में आरोपी वलीउल्ला और शमीम पर लगे देशद्रोह, हत्या औऱ अन्य गंभीर मुकदमें वापस लिए जाने की उत्तर प्रदेश की तैयारी पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आर.के अग्रवाल और जस्टिस आर.एस.आर मौर्य की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि आऱोपी आतंकी है या नहीं, यह तय करना कोर्ट का काम है राज्य सरकार का नहीं। उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के विरोध में वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश श्रीवास्तव और एडवोकेट नित्यानंद चौबे ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोपियों पर लगे मुकदमें हटाने को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मुकदमा हटाने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार से आख्या मांगी है। इलाहाबाद हाइकोर्ट के तल्ख टिप्पणी से विपक्षी पार्टियों विशेषकर बसपा औऱ भाजपा को घर बैठे मुद्दा मिल गया। इन पार्टियों ने अखिलेख सरकार की जमकर आलोचना की है। वाराणसी और रामपुर ब्लास्ट मामले के अलावा अखिलेख सरकार कई जाने-माने लोगों पर दर्ज मामले या तो वापस ले लिए हैं या फिर वापस लेने की तैयारी की है। इनमें प्रमुख रुप से कैबिनेट मंत्री आजम खान, भाजपा सांसद वरुण गांधी, सपा के पूर्व सिपाहकार रहे अमर सिंह और फिल्म अभिनेता संजय़ दत्त प्रमुख हैं। राज्यसभा सांसद अमर सिंह पर 2009 में माया सरकार के समय में मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किए गए थे। जबकि रामपुर जिले में कैबिनेट मंत्री आजम खान पर चार केस दर्ज किए गए। ये मामले 2007 में बसपा सरकार में दर्ज किए गए थे। इन्हें वापस लेने की प्रक्रिया रामपुर की अदालत में चल रही है। आजम खान पर 2007 में बसपा प्रमुख मायावती पर आपत्तिजनक भाषण देने औऱ रामपुर के जिलाधिकारी पर हमला करने के आरोप में मुकदमें दर्ज किए गए थे। इसी प्रकार 2011 में यूपी सरकार ने गौतमबुद्धनगर के भट्टा पारसौल गांव के किसानों पर दर्ज सारे मामले वापस ले लिए। गौरतलब है कि भट्टा पारसौल गांव के किसान अपनी जमीनों का मुआवजा बढ़ाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। प्रदर्शन के दौरान ही आंदोलन कर रहे किसानों पर कई मामलों में केस दर्ज किए गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार के इन फैसलों पर अपनी राय जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गोगना कहते हैं कि एक सरकार मामले दर्ज करे दूसरी सरकार मामले वापस ले ले ऐसे फैसलों से नेताओं को तो फायदा होगा। लेकिन न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी औऱ इससे आम आदमी का न्यायिक प्रक्रिया से विश्वास उठ जाएगा। गोगना का यह भी कहना था कि सरकार अगर ऐसा कदम उठाती है तो यह न्यायपालिका और प्रजातंत्र के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के अनुसार अपराध हुआ है या नहीं इसे तय करना न्यायालय का काम है सरकार का नहीं। अगर सरकारें ऐसे कदम उठाने लगेंगी तो कोर्ट क्या काम करेगी। जाहिर सी बात है अगर राज्य सरकारें मनमाने तरीके से किसी पर द्वेष की भावना से प्रेरित होकर मुकदमा दर्ज करती रहेंगी और सत्ता में आने के बाद दूसरी पार्टियां सारे केस वापस लेती रहीं तो न्याय प्रक्रिया प्रभावित तो होगी ही साथ में अराजकता को बढ़ावा मिलेगा। जगह-जगह बात-बात पर राजनीतिक लोगों समेत कई लोगों पर फर्जी मुकदमों की भरभार होगी। फिर सत्ता परिवर्तन पर केस वापस लेने की होड़ होगी। इससे सरकारी कामकाज प्रभावित होगा औऱ कोर्ट में मुकदमों की बाढ़ सी आ जायेगी। लोग न्याय के लिए कोर्ट पर कम राजनीति औऱ नेताओं पर अधिक भरोशा करेंगे। आम आदमी न्याय के लिए भटकता फिरेगा। राजनीतिक स्तर के लोग मनमाने तरीके से काम-काज करेंगे। समाज में हर तरफ अराजकता के माहौल में लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। लोगों की उम्मीद कोर्ट ही है जो समय-समय पर सरकार के कामकाज पर निगाह रखती है और जनहित पर प्रभाव पड़ने वाले फैसलों पर कोर्ट ही कड़ी निगाह रहती है। सरकार अपनी जिम्मेदारी फली-भांति निभाए या ना निभाए लेकिन कोर्ट अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम देती है। कोर्ट की वजह से ही कई दिग्गज नेताओं को जेल की हवा खानी पड़ी है औऱ संबंधित केस के जुड़े कई अहम सुराग भी जनता के सामने आए। अगर सरकारें ही देश की न्याय व्यवस्था पर चोट पहुंचाती रहेंगी तो देश में कानून नाम की कोई चीज, चीज बनकर रह जाएगी

रविवार, 2 दिसंबर 2012

पहल


गंगा की अविरलता के लिए समग्र गंगा अभियान

  
चन्दौली। धानापुर स्थित नरौली गंगा घाट पर समग्र गंगा अभियान के तहत समाजसेवीयों एवं स्थानीय लोगों ने मानव श्रृंख्ला बनाकर गंगा को अविरल, निर्मल स्वच्छ बनाने का प्रण लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डा0 हरेन्द्र राय ने कहा कि समग्र गंगा अभियान का मकसद सरकारों को मां गंगा को अविरल निर्मल बनाने का संदेश देना है। गंगोत्री से गंगा सागर तक मानव श्रृंख्ला बनाया जा रहा है। पूरे देश की जनमानस मां गंगा को अविरल निर्मल देखना चाहती है। सरकारों ने गंगा के निर्मलता पर तो कई योजनाएं चलायीं मगर उनका परिणाम कुछ नहीं निकला। गंगा के निर्मलता के नाम पर करोड़ों का घपला हुआ है। गंगा पर बने बांधों को हटाया जाए तथा कल कारखानों से निकलने वाले दूषित जल को साफ कर के ही गंगा में बहाया जाए। गंगा सिर्फ नदी नहीं हमारे आस्था की प्रतीक है, मां है हमारी। दोपहर 1.05 बजे से 1.25 बजे तक सैकडों लोगों ने नरौली गंगाघाट पर दो किलोमीटर का मानव श्रृंख्ला बनाया। इससे पहले बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया।

 
इस दौरान कमलाकांत मिश्र, डा0 अजीत सिंह, रामजी मिश्र, राजेश्वर सिंह, डा0 रामअनुज यादव, राणा प्रताप, रामजी गुप्ता, रमेश सिंह, कमलेश कुमार मिश्र, बांके सेठ, डा0 अरविन्द मिश्र, सुर्फुद्दीन, सुरेन्द्र सिंह, रविशंकर सिंह, रमेश दुबे, आरिफ खां, भवानी सिंह, आकाश पाण्डे, पवन सिंह, हृदय नरायण तिवारी, मृत्युंजय सिंह, कामेश्वर दूबे, मिथलेश सिंह, जानकी देवी, मनोरमा, कविता वर्मा, लाजवंती देवी समेत सर्व समाज के सैकडों लोगों मौजूद रहे।  

 एम. अफसर खां सागर

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

भाई राजीव दीक्षित के बाद स्वदेशी आंदोलन की दिशा-नौ दिन चले अढ़ाई कोस



मित्रों इस पोस्ट पर कुछ भी लिखने से पहले मै एक बात पहले से स्पष्ट कर देना चाहता हूँ की मै भाई राजीव दीक्षित का एक प्रबल समर्थक हूँ एवं उनके आदर्शो के अनुसार कार्य  करने की कोशिश करता हूँ। इस पोस्ट का उद्देश्य किसी भी प्रकार से भी भाई राजीव दीक्षित या किसी सम्बद्ध पर प्रश्न उठाना नहीं मगर एक स्वाभाविक समर्थक होने के कारण अपने प्रश्न और विचार आज राजीव भाई को श्रद्धांजलि  देने के बाद प्रकट करना चाहता हूँ। राजीव भाई के विषय मेरी पिछली पोस्ट कृपया यहाँ पढ़ें। 
राजीव दीक्षित किसी परिचय का मोहताज शब्द नहीं है जैसा की पहले भी कई अवसरो पर मै कह चुका हूँ की आधुनिक भारत मे यदि दो महापुरुषों की बात करू तो राजीव भाई और विवेकानंद  को काफी  ही पाता हूँ।राजीव भाई का आंदोलन आजाद इंडिया मे था और विवेकानंद का गुलाम भारत मे ॥मगर उद्देश्य दोनों ही समय,हिंदुस्थान मर चुके स्वाभिमान को जगाना था. 
राजीव भाई के दुखद निधन के बाद जो अपूर्णीय क्षति हुई उस रिक्त स्थान को भर पाना असंभव सा प्रतीत हो रहा था । मगर मुझे और मेरे जैसे कई राजीव भाई के  अनुयायियों को ये जान कर बहुत ही संतुष्टि हुई की राजीव भाई के आंदोलन की अगली कड़ी स्वदेशी भारत पीठम के रूप मे भाई प्रदीप दीक्षित जी आगे बढ़ा रहे हैं। इसी सन्दर्भ में  पिछले साल भाई प्रदीप दीक्षित जी का व्याख्यान ६ नवम्बर 2011 (रविवार) को नई दिल्ली में जनकपुरी स्थित आर्य समाज मंदिर में भाई अरुण अग्रवालजी के देखरेख एवं प्रबंधन  में संपन्न हुआ था । उसके बाद हम कई राज्यों से समर्पित कार्यकर्ता वर्धा पहुचे और विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम वहाँ आयोजित हुए। 
मगर धीरे धीरे जैसे जैसे समय  बीतता गया ऐसा  अनुभव हुआ की कई समर्पित कार्यकर्ता धीरे धीरे इस आंदोलन के प्रति उदासीन होते गए उनके अपने तर्क थे । इस बीच हालाँकि आंदोलन से जुडने वाले लोगो की भी कमी नहीं थी । कुछ मुद्दो पर व्यक्तिगत रूप से मै भी व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं था मगर यदि एक बहुत बड़ा जनजागरण का अभियान चल रहा हो तो किसी व्यक्ति विशेष की असहमति ज्यादा महत्त्व नहीं रखती। मगर पिछले कुछ दिनो मे धरताल पर कार्य करते समय एवं सामाजिक  संचार के साधनो के माध्यम से मुझे ऐसा प्रतीत हुआ की एक हम सभी राजीव भाई के समर्थको के साथ साथ एक ऐसा समूह समाज मे तैयार हो रहा है जो अब तक राजीव भाई के विरोध मे आ चुका है ।शायद  आने वाले दिनो मे ये ज्यादा मुखर हो । दुख की बाद ये है ये एक बड़ा वर्ग सिर्फ राजीव भाई के आंदोलन के प्रबन्धको की नाकामी के कारण उनका विरोध कर रहा है ॥ 
इनमे से कुछ लोग कभी राजीव दीक्षित के समर्थक या कुछ लोग तटस्थ लोग हैं  ॥मैंने अपने अनुभवों और सर्वेक्षण के आधार पर कुछ बाते पायी है जो इस ब्लॉग के माध्यम से सामने रख रहा हूँ ॥ इससे आप सहमत भी हो सकते हैं या असहमत क्यूकी ये मेरा अपने स्तर से किया गया व्यक्तिगत  सर्वेक्षण है । यदि कटु लगे तो क्षमा प्रार्थी हूँ । ये सारे सर्वेक्षण उत्तर भारत के है ।  

1 ऐसा कई कार्यकर्ताओं  को लग रहा है की राजीव भाई का आंदोलन सिर्फ सीडी बेचने का धंधा बन के रह गया है । किसी सार्वजनिक मुद्दे पर इसकी उपस्थिती न के बराबर या स्टॉल लगाने तक होती है । आन्दोलन के लोग भावनाओ को बेचने से आगे कुछ नहीं कर रहे है । 

ज़्यादातर आंदोलन शहरो के इर्द गिर्द सीमित है (शायद महाराष्ट्र इसका अपवाद हो)। यदि ग्रामीण क्षेत्रों मे कुछ कार्य हो रहा है तो फिर प्रबंधन की कमी के कारण आस पास के लोगो तक इसकी खबर नहीं पहुच पाती है.

3 आंदोलन के कुछ क्षेत्रों के कर्णधार  कम से कम समय मे ज्यादा से ज्यादा प्रसिद्ध होना चाहते हैं,या दूसरे शब्दों मे कह ले तो हर दूसरा व्यक्ति अपने आप को राजीव भाई ही समझ रहा है उनके जैसा बनने का प्रयास करने मे कोई बुराई नहीं मगर उन तथाकथित लोगो को ये सर्वदा ध्यान रखना होगा की  "राजीव दीक्षित " के लिए समाज का हित सर्वोपरि था । 

4  पिछले साल के कार्यक्रम मे Paid Poets का विचार काफी लोगो को निरर्थक लगा॥ कई लोगो को ऐसा प्रतीत हुआ की कई तथाकथित स्थापित कवि लोग राजीव भाई को श्रद्धांजलि देने की बजाय अच्छी ख़ासी कमाई  और प्रचार के उद्देश्य से वर्धा पधारे थे । जबकि सुदूर राज्यों से आने वालों का उद्देश्य कुछ और था । 

5 भाई राजीव दीक्षित के आंदोलन को आगे बढ़ाने मे भारत स्वाभिमान का एक विशेष योगदान था क्यूकी भारत स्वाभिमान मे गाँव गाँव तक फैला हुआ संगठन है मगर स्वदेशी भारत पीठम और भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओं के बीच पिछले साल वर्धा मे 30 नवम्बर को स्वदेशी मेले के दौरान पोस्टर लगाने को ले कर हुए विवाद ने ये स्पष्ट कर दिया की इन दोनों संगठनो के बीच सब कुछ अच्छा नहीं है । 
इस विषय पर मैंने भारत स्वाभिमान के कुछ  वरिष्ठ लोगो से बात की उनके अनुसार कुछ एक लोग जो उस समय स्वदेशी भारत पीठम वर्धा मे थेवो भारत स्वाभिमान हरिद्वार कार्यालय से निष्कासित/स्वेछा से चले गए लोग थे,अतः उन लोगो का स्वामी रामदेव के संबंध मे विचार नकारात्मक था जो गाहे बेगाहे संचार और सामाजिक मीडिया के साधनो द्वारा  सामने भी आता था। इसके कारण भी स्वामी रामदेव  के भारत स्वाभिमान ने  स्वदेशी भारत पीठम से दूरी बना ली । हलाकी  कौन सही  है ये एक अलग विषय था। इस विषय मे वर्धा कार्यालय तक कई लोगो ने अपने विचार पहुचाए मगर कार्यवाही कुछ खास नहीं हुई। मुझे नहीं लगता की स्वामी रामदेव इस साल वर्धा आएंगे यदि आए भी तो ये सिर्फ राजीव भाई को श्रद्धांजलि प्रेषण और भाई प्रदीप दीक्षित जी से व्यक्तिगत संबंधो के कारण होगा। 

6 बाबा रामदेव और स्वदेशी भारत पीठम के विचार लगभग एक ही है अतः स्वाभाविक है की जब तक किसी एक एक संगठन ने "विचारों का व्यवसायीकरण" नहीं किया है तब तक सब सही रहेगा॥ स्वामी रामदेव का संगठन पहले से ही स्वदेशी उत्पादो के प्रचार प्रसार एवं व्यवसाय मे है अतः स्वदेशी भारत पीठम जब भी आंशिक या पूर्णतया कोई व्यावसायिक परियोजना शुरू करता है, भारत स्वाभिमान इसे अपने स्वदेशी व्यापार मे एक अन्य साझीदार/प्रतिस्पर्धी की तरह देखेगाअतः धरातल पर सहयोग संभव नहीं है ।

अब एक ऐसा विषय जो इन सब से इतर है । राजीव भाई के कुछ व्याख्यानों पर जो समाज मे प्रसारित किए जा रहे हैं उस पर कुछ लोगो को आपत्ति है। जैसा की सभी जानते हैं की राजीव भाई के शोध कार्यों मे उनकी टीम का भी एक महत्त्वपूर्ण योगदान होता था जो उनके दिशानिर्देशों पर काम करती थी। ये एक स्वाभाविक सी बात है की कुछ तथ्यों और आंकड़ो मे कुछ बाते ऐसी हो जिससे सहमत न हुआ जा सके । जाने अनजाने उन तथ्यों को प्रसारित किया जा रहा है जिससे की एक विचारधारा के लोगो को समस्या और कुछ का महिमामंडन होता है । अब राजीव भाई तो इन प्रश्नो का उत्तर देने के लिए हैं नहीं और उनके आंदोलन के तथाकथित प्रबन्धक इन आपतियों पर कोई संग्यान नहीं लेते। "इस्कॉन मंदिर" ,"मंगल पांडे" "महात्मा गांधी" ,"वीर सावरकर" ,"गौ हत्या का कारण अंग्रेज़??जैसे धर्म और इतिहास के अनेक मुद्दे  संवेदनशील मुद्दो पर इस आंदोलन के विचार स्पष्ट नजर नहीं आते । न ही कोई ऐसा माध्यम है जहाँ से इन बातों का स्पष्टीकरण मिल सके । 
अतः कई लोग सिर्फ कुछ एक विवादित मुद्दों के स्पष्टीकरण न मिलने के कारण या तो उदासीन या विरोध मे आ गए है । इससे नुकसान ये है कुछ 1-2% बातों  को गलत दिखाकर वो सारे शोधकार्यों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। 

राजीव भाई का पार्थिव शरीर 
8 राजीव भाई की आकस्मिक मृत्यु और उसपर उठते प्रश्नो पर आज तक कोई स्पष्ट विचार नहीं आया जिससे इस मुद्दे पर नित्य नयी नयी कहानियाँ बनाई जाती रहती है । आंदोलन से जुड़े कुछ लोग ऐसे भी है जो आलोचना करने वालों पर व्यक्तिगत हो कर और आक्रामक हो कर प्रतिक्रिया देने लगते है जबकि उन्हे धैर्यपूर्वक ये समझना चाहिए की आलोचनाओ से सुधार और परिष्करण की नीव पड़ती है। 

ये देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है की राजीव भाई के आंदोलन से लाखो लोग जुड़ रहे है मगर ये एक कटु सत्य है की प्रबंधन की कमी के कारण उसी प्रकार कुछ लोग आंदोलन से दूर भी होते जा रहे हैं। उन्हे स्थायी रूप से जोड़े रखने के लिए कोई योजना नहीं दिखाई देती।विचारो और आंदोलन की दशा और दिशा का संवर्धन पिछले सालो मे हुआ है उससे बहुत जायदा संतुष्टि  समर्थको को नहीं हुई होगी। 

इन सारे विरोधाभाषों के बाद राजीव भाई का एक स्वाभाविक समर्थक  होने के कारण  अपने सभी मित्रों को  इस आंदोलन से जुडने का अनुरोध करता हूँ और ऐसा विश्वास है की  भाई प्रदीप जी के नेतृत्व मे ये आंदोलन सफल होगा और राजीव भाई की विचारधारा का क्रियान्वयन वास्तविकता के धरातल पर सक्रिय रूप से आने वाले वर्षों मे दिख पाए।

राजीव भाई जी को उनके जन्मदिवस एवं द्वितीय पुण्यतिथि पर सादर नमन एवं श्रद्धांजलि.

मंगलवार, 27 नवंबर 2012

जैव-विकास: दसावतार के रूप में (Evolution in form of Dasaavatar of Lord Vishnu)

"बदलाव एक मात्र ऐसी चीज है जो कभी नहीं बदलती"
-राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी 

      
हम बचपन से विज्ञान का एक प्रसिद्ध सिद्धांत पढ़ते आये हैं- ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Energy conservation)
''ऊर्जा (Energy) न तो उत्पन्न की जा सकती है न ही नष्ट की जा सकती है, ये केवल एक निकाय(System) से दूसरे निकाय में स्थानांतरित होती है  और एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। ब्रह्माण्ड की कुल ऊर्जा नियत और संरक्षित रहती है।''

बिलकुल ऐसी ही बात भगवत गीता में भी लिखी है :
''आत्मा न तो जन्म लेती है न मरती है , ये केवल एक शरीर से दूसरे में स्थानांतरित में होती है। सभी आत्माएं एक ही परमात्मा से निकलती है और फिर उसी में मिल जाती हैं।''

गीता के अनुसार एक आत्मा का परमात्मा से अलग होकर शरीर धारण करने से जीवों का जन्म होता। वो जीव अपने जीवन के सभी जैविक कार्य करते हुए अंत में फिर से उसी परमात्मा में मिल जाता है। उसमें से कुछ जीव ऐसे होते हैं जो जीवन-विकास की प्रक्रिया को एक नयी सकारात्मक दिशा देते हैं ,इन जीवों को कहा जाता है "अवतार".

प्रजातियों का उद्भव (Origin of Species):

भगवान् विष्णु के प्रसिद्ध 10 अवतारों की बात करने से पहले मैं एक महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन की बात करना चाहुँगा। डार्विन ने अपनी एक किताब Origin of Species के माध्यम से पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। इसाई और इस्लामिक धर्मावलम्बियों ने डार्विन का घोर विरोध किया।
लेकिन फिर भी डार्विन के सिद्धांत के द्वारा हम अपने ग्रह पे हुए जैव-विकास(Evolution) को पुरे प्रामाणिकता  के साथ समझ सकते हैं।

डार्विन की यह क्रांतिकारी खोज इतनी आसानी से नहीं हुयी। अपनी खोज की शुरुवात डार्विन ने पूरी दुनिया में यात्रा करके वहां पाई जाने वाली प्रजातियों के अध्ययन से की।

डार्विन ने 12 ऐसे द्वीपों पे यात्रा की जो पूरी तरह से एक दुसरे से समुद्र के द्वारा से विलगित थे।



Darwin's Voyage


 द्वीपों पर रहने वाली प्रजातियों का अध्ययन करके डार्विन को कितना आश्चर्य हुआ ये उनके बोले हुए शब्दों से साफ़ व्यक्त होता है :
"मुझे ये जान के आश्चर्य हुआ कि अमेरिका , अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के द्वीपों पे विभिन्न जीवों की  इतनी प्रजातियाँ पायी जाती हैं और ये द्वीप एक दुसरे से बिलकुल विलगित होने के बावजूद इन पे पायी जाने वाली प्रजातियों में मूलभूत समानताएं इस प्रकार हैं जैसे ये सभी किसी एक ही पूर्वज से विकसित हुयी हों "

A note from Darwin's Diary


डार्विन और उनके बाद के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पे पायी जाने वाली कुल 87 लाख यूकैरियोटिक प्रजातियों के पाए जाने का अनुमान लगाया है।
क्या इसे एक संयोग समझें या फिर हमारे ऋषियों का अद्भुद ज्ञान कि हमारे ग्रंथों के अनुसार पृथ्वी पे 84 लाख प्रजातियाँ पायी जाती हैं। ये आंकड़ा वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित आंकड़े के बहुत करीब हैं।



Different species are an evidence of Evolution


डार्विन के अनुसार जैव-विकास का क्रम(Order of Evolution according to Darwin):

डार्विन अपने लम्बे अनुसन्धान के बाद जिस नतीजे पे पहुचे वो संक्षेप में इस तरह समझा जा सकता है:
1.Chordates (Fish):डार्विन के अनुसार पृथ्वी पे सर्वप्रथम जलीय जीव(Aquatic Organism) आये। समुद्रों में जलीय जीव, सरल से जटिल होने शुरू हुए
2.Tetrapodes (Amphibian with legs):उसके बाद ऐसे जीवों का विकास हुआ जो पानी और जमीन दोनों जगह पे रहने के लिए अनुकूलित थे। इन जीवों को उभयचरी(Amphibian) कहा जाता है
3.Mammals:विकास का क्रम आगे बड़ा और स्तनधारी(Mammalian) जानवरों का विकास हुआ,जिनकी वजह से दैत्याकार डाइनासोर का अंत हुआ
4.Primates (to Hominidae):इन स्तनधारी जानवरों में धीरे धीरे आधुनिक मानव के लक्षण दिखने लगे थे
5.Hominidae before Homo Erectus (more like humans but much shorter):फिर पेड़ों पे रहने वाले , शारीरिक रूप से कम विकसित पर मानसिक रूप से बुद्धिमान जीवों का निर्माण हुआ
6.Homo Erectus (to Homo Sapiens):इसके बाद बने आदि मानव, औजारों और हथियारों का इस्तेमाल करना सीख गए थे
7.Homo Sapiens:और फिर पूर्ण विकसित आधुनिक मानवों का आगमन हुआ।



Stages of Evolution



सिर्फ सात बिन्दुओं में लिखी विकास की ये प्रक्रिया वास्तव में करोणों वर्षों में पूरी हुयी।जिसमें डाइनासोर आना और लुप्त हो जाना भी सम्मिलित है।


दसावतार के रूप में जैव-विकास( Evolution in the form of Dashavataar)

पिछली पोस्ट में हमने ये जाना था कि विष्णु के तीसरे रूप यानि क्षीरोदक शई विष्णु जो कि क्षीर सागर में रहते हैं उनसे विभिन्न अवतारों का जन्म होता है। यूँ तो पृथ्वी पे जन्म लेने वाला प्रत्येक जीव उन्ही का रूप है किन्तु उनमें से 24 जीवों को अवतार की संज्ञा दी गयी है।
उन 24 अवतारों में से 10 को सर्वाधिक महिमा मंडित किया गया।
विष्णु के ये 10 अवतार क्रम से इस प्रकार हैं:
1.मत्स्य अवतार (The Fish)
2.कुरमा अवतार (The Turtle)
3.वराह अवतार (The First Mammal)
4.नरसिंह अवतार (Half Man-Half Animal)
5.वामन अवतार (The Dwarf)
6.परशुराम अवतार (Man with Iron Weapon)
7.राम अवतार (Man who tought the lesson of Dicipline)
8.कृष्ण अवतार (Man who tought the lesson of Management)
9.बुद्ध अवतार (Man who tought the lesson of Peace)
10.कल्कि अवतार (Half Man-Half Machine)

विष्णु के शुरू के 5 अवतार जैव-विकास(Biological-Evolution) को दर्शाते हैं और बाद के 5 अवतार सभ्यता-विकास(Civilization-Evolutin) को दर्शाते हैं।

1.मत्स्य अवतार (The Fish):

विष्णु का पहला अवतार एक जलीय जीव है।हालाँकि मछली से पहले और भी बहुत सारे निम्न स्तरीय जलीय जीव आये किन्तु क्रन्तिकारी परिवर्तन लाने वाला मत्स्य बहुत ही महत्वपूर्ण है।शायद इसी वजह से इसे अवतार की संज्ञा मिली।



Matsya Avtar: Begining of life in water

 

2.कुरमा अवतार (The Turtle):

मछली के बाद अगला महत्वपूर्ण जीव जो जल और जमीन दोनों जगह रहने के लिए अनुकूलित है। जीव विज्ञान में इन जीवों को उभयचरी (Amphibian) कहते हैं।
विष्णु का दूसरा अवतार कुर्म एक Amphibian यानि  एक कछुआ है। कछुए को इतना महत्व मिलने का कारण यही है कि यहीं से जमीन पे रहने वाले जीवों का पृथ्वी पे आगमन हुआ।

Kurma Avtar: Amphibian,Adapted to live in water as well as on land

3.वराह अवतार (The First Mammal):

थल पे रहने वाले जीवों में जब विकास होना शुरू हुआ तब उच्च स्तरीय जीवों के लक्षण आने शुरू हो गए।तभी जन्म हुआ विष्णु के तीसरे अवतार वराह का, जो की एक स्तनधारी जानवर(Mammalian Animal) है। वराह अवतार ने दैत्याकार असुर का विनाश करके भूदेवी (Land) की रक्षा की थी।




Varah Avtar: Mammal who saved the Land from Giant Dinosaur


4.नरसिंह अवतार (Half Man-Half Animal):

स्तनधारी जंतुओं में अब मानव के लक्षण प्रकट होने शुरू हो गए। नरसिंह अवतार एक ऐसे प्राणी हैं जिनमें आधे लक्षण पशु के और आधे लक्षण मानव के हैं।


Narsimha Avtar: Half man Half Lion

5.वामन अवतार(The Dwarf):

विष्णु का पांचवा अवतार वामन , शारीरिक रूप से अल्प-विकसित है लेकिन अत्यंत बुद्धिमान है।
इसकी तुलना आप आदि-मानव से कर सकते हैं। Biology बताती है कि अगर आदि-मानव इतने बुद्धिमान ना होते आज हम इतने विकसित मानव नहीं बन पाते।


Vaman Avtar: A wise Dwarf

6.परशुराम अवतार (Man with Iron Weapon):

पृथ्वी पे मानवों का आगमन हो गया। विष्णु के छठे अवतार परशुराम, गुफाओं और जंगलों में रहते थे। और उनके हाथ में एक लोहे का हथियार 'परशु' था।
इस से ये साफ़ पता चलता है कि  जैव-विकास के बाद जब सभ्यता का विकास होना शुरू हुआ तब मानव औजारों और हथियारों का इस्तेमाल करने लगा।
गुफा-जंगल में रहते हुए हथियार धारण किये हुए विष्णु के परशुराम अवतार  इसी लिए महत्वपूर्ण हैं।


Parshuram Avtar: Angry man with Iron weapon 'Parshu'

7.राम अवतार (Man who tought the lesson of Dicipline):

राम से हम सब अच्छी तरह से वाकिफ हैं। उनके जीवन पे हर युग में कई किताबें लिखी गयी हैं।
साधारण मानव के रूप में जन्म लेकर नियम और अनुशासन का पालन करने में अपना जीवन लगा  देने वाले राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं।
राम से पहले आये अवतार शारीरिक और मानसिक रूप से तो विकसित हो गए थे लेकिन जीवन को कैसे जीना है , हमारे कर्तव्य क्या हैं और सभ्यता क्या होती है , ये बातें राम ने सिखाई।


Ram Avtar: The Perfect man

8.कृष्ण अवतार (Man who tought the lesson of Management):

राम की ही तरह कृष्ण भी विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। गीनीज बुक में दर्ज दुनिया की सबसे लम्बी कविता 'महाभारत' के नायक हैं कृष्ण। दुनिया का कोई भी व्यक्ति जो भारतीय दर्शन के बारे में कुछ भी जानता है वो कृष्ण को जरुर जानता है।
रामावतार के साथ मानव ने ये तो सिख लिया था कि कर्तव्यों का पालन करना है लेकिन कर्तव्य पालन के मार्ग में आने वाली दुविधाओं का समाधान कहाँ मिले? किसे हम अपना शत्रु समझें और किसे मित्र? अपने और सम्पूर्ण मानवता के अस्तित्व को बचाने के लिए किस धर्म का पालन करें?, इन सब सवालों के समाधान विष्णु के अवतार कृष्ण ने दिए। महाभारत युद्ध के समय अर्जुन को दिया गया उपदेश 'श्रीमद-भगवत-गीता' भारतीयों का सबसे पवित्र धर्म ग्रन्थ बना।
कृष्ण को विष्णु का सम्पूर्ण अवतार माना गया है इसलिए जब एक चित्रकार निराकार परमात्मा की कल्पना करता है तो उसे कृष्ण का ही रूप प्रदान करता है। गौरतलब है कि सर्वशक्तिमान विष्णु , बिग बैंग से पहले प्रकृति के रूप में मौजूद थे, बिग बैंग के समय हिरण्यगर्भ के रूप में थे और बिग बैंग के बाद परमाणु के रूप में मौजूद हैं।


Krishna Avtar: The complete incarnation

9.बुद्ध अवतार (Man who tought the lesson of Peace):

"अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ना पड़ेगा, खुद जिन्दा रहना है तो अपने शत्रु को मारना पड़ेगा"
अब तक इसी सिद्धांत का पालन किया जा रहा था।लेकिन मेरा मानना है कि मानवता के विकास में सबसे महान दिशा दिखाने वाले अवतार थे गौतम बुद्ध। बुद्ध ने इंसान को सही मायने में इंसान बनना सिखाया। बुद्ध द्वारा दिखाया गया अहिंसा और शांति का रास्ता आज पूरा विश्व अपनाता है। आज आप देखते हैं कि किसी की किसी से भी दुश्मनी हो, उस समस्या के समाधान के लिए बहस करते हैं, अदालत में जाते हैं, आन्दोलन करते हैं, अपनी बात को समझाने के लिए मीडिया का सहारा लेते हैं लेकिन हिंसा करने से बचते हैं। आज पूरी दुनिया के हर समाज, हर देश,हर मान्यता में हिंसा को गलत माना गया है(तालिबान को अपवाद समझें).


Buddha Avtar:The teacher of humenity

10.कल्कि अवतार (Half Man-Half Machine):

विष्णु के कल्कि अवतार का अब तक जन्म नहीं हुआ है। इसका जन्म कलियुग में ही भविष्य में होगा। कल्कि अवतार आधुनिक मशीनों से युक्त होगा, विद्युत् से भी तेज़ गति करने वाले वाहन पे सवार होगा और समय-यात्रा (Time-Travelling) उसके लिए असंभव नहीं होगी।
कल्कि के इस रूप का वर्णन सुन के आपको टर्मिनेटर मूवी के अर्नोल्ड की याद जरुर आ सकती है।




Kalki Avtar: The future man



विष्णु के इन 10 अवतारों के साथ तरह तरह की कहानियां जोड़ दी गयी। शायद इसी वजह से हम इसमें छिपे गहन वैज्ञानिक सिद्धांत को  देख नहीं पाए।लेकिन अगर हम इन क्रमिक 10 अवतारों की तुलना, डार्विन के बताये Evolution के क्रम से करें तो हम इस नतीजे पे पहुँचते हैं कि दोनों श्रृंखलाओं की एक एक कड़ियाँ सामान हैं।



Comparision: Evolution according to Darwin and according to Dashavtar