रविवार, 29 जनवरी 2017

पूर्वांचल ब्लागर्स मंच के संयोजक आशुतोष नाथ तिवारी को मिला उत्कृष्ट शिक्षक का सम्मान

पूर्वांचल ब्लागर्स मंच के संयोजक आशुतोष नाथ तिवारी को मिला उत्कृष्ट शिक्षक का सम्मानI
देवरिया  गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी 2017 को पूर्वांचल ब्लागर्स असोसिएशन के संयोजक एवं वर्तमान में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में रुद्रपुर विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय सोनबह में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत,पूर्वांचल ब्लागर्स मंच के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष नाथ तिवारी  को जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव एवं पुलिस अधीक्षक मोहम्मद इमरान ने सम्मानित किया
श्री तिवारी को यह  सम्मान  शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं अपनी उत्कृष्ट सेवाएँ देने के लिए मिला श्री तिवारी ने विगत कुछ माह से अपनी सेवाएँ बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश को देना प्रारम्भ किया  है I शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के लिए कार्यरत श्री तिवारी सामजिक कार्यों एवं राष्ट्रवादी लेखन से जुड़े रहें हैं I श्री तिवारी ने इस सम्मान के लिए समस्त ब्लाक रिसोर्स  सेंटर  के समस्त प्रभारियों एवं  अधिकारीगणों का  आभार व्यक्त  करते हुए कहा  कि “ शिक्षा का अंतिम साध्य बच्चों का सर्वांगीण विकास है और  वर्तमान शिक्षा में नैतिकता  और चारित्रिक मूल्यों  का एक नया आयाम जोड़ना छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए अति आवश्यक है I गणतंत्र दिवस समारोह में देवरिया जिले के विभिन्न स्कूलों से आये बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को जिलाधिकारी अनीता श्रीवास्तव  ने सम्मानित किया I
(खबर साभार : गीत)

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

Cashless Economy Vs Shameless Politics


कैशलेस इकोनोमी सिर्फ एक अवधारणा है, वास्तव में ऐसा अभी तक विश्व में ऐसा कहीं भी संभव नहीं हो सका है और शायद यह संभव हो भी नहीं सकेगा. इसलिए हमेशा प्रयास  होते है “लेस कैश इकोनोमी (Less Cash Economy)”  के शायद वह भारत में वर्तमान नोट बंदी से काफी हद तक संभव हो सकेगा. नंदन नील्करनी ने हाल में ही कहा था कि इ-पेमेंट की दिशा में जिस काम को करने में ६ साल लगते वह अब ६ महीने में हो जायेगा. ऐसा हो रहा है बहुत तेजी से कम से कम शहरों में तो ही रहा है. इसके दूरगामी परिणाम होंगे और तुरंत न सही लेकिन इससे लेस कैश इकोनोमी बनने की गति तेज होगी. जो भी हो, ये सही कि अचानक लिए गए नोट बंदी के  निर्णय से जनता को परेशानी हो  रही है लेकिन ये भी सही है कि जनता सरकार के  इस अटपटे से दिखने वाले कार्य सामान्यतया खुश दिख रही है.


विपक्षी दलों ने नोट बंदी के इस फैसले को विरोध का बहुत गंभीर मुद्दा बनाया हुआ है और संसद से सड़क तक विरोध कर रहे हैं. इसका परिणाम ये हो रहा है कि धीरे धीरे जनता भी इन परेशानियों को  मानसिक रूप से वास्तविकता से कहीं अधिक समझाने लगी है. योजना लागू करने में कमिया हो सकती हैं और हैं भी लेकिन क्या विरोध का तरीका इतना सतही होना चाहिए कि जो विपक्षी दल भारत बांध में शामिल न हों उन्हें गद्दार कहा जाय. 

हद तो तब हो गयी जब ममता बनेर्जी ने सेना के नियमित कार्ययोजनाओं को पशिम बंगाल में सैन्य विद्रोह की संज्ञा दी और कहा कि सेना लूट कर रही है. पता नहीं वे पश्चिम बंगाल को एक देश समझती है और खुद को वहां की महारानी. आखिर राज्य में सैन्य विद्रोह की क्या जरूरत ? किसी मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने के लिए तो राज्यपाल ही काफी है. सबसे हास्यापद बात तो ये कि उन्होंने आरोप लगाया कि ममता  के प्लेन को कलकत्ता में उतरने में देर की गयी और इससे उनकी जान को खतरा हो सकता था. हर बड़े एअर पोर्ट पर व्यस्त समय में विमान को आसमान में इन्तजार करना पड़ता है और ये समय १५ से ३० मिनट का हो सकता है. मै  स्वयं भी कल मुम्बई एअरपोर्ट पर रात  १० बजे जेट की उड़ान में था जिसे आसमान में लग्न्हाग २० मिनट इन्तजार करना पड़ा.  इंडिगो के  विमान जिसमें ममता जी थीं उनके अतरिक्त लगभग १०० अन्य यात्री थे. क्या ममता की जान पर  ख़तरा करने के लिए १०० अन्य यात्रियों की जान केंद्र सरकार के इशारे पर ली  जा सकती है ? पता नहीं राजनैतिक गिरावट की अंतिम सीमा क्या होगी ?
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शिव प्रकाश मिश्रा 
http://lucknowtribune.blogspot.in



रविवार, 27 नवंबर 2016

नहीं रहे क्यूबा की क्रांति के जनक और वामपंथ के स्तम्भ फिडेल कास्त्रो



फिडेल कास्त्रो एक घोर अमरीका विरोधी वामपंथी थे। क्यूबा की क्रांति के इस जनक को 1952 में 18 साल की जेल हुई मगर 1955 में माफ़ी दे दी गयी और ये मैक्सिको चले गए वहां इनकी मुलाकात चे घिवेरा से हुई ..वहां से सन 1956 में वामपंथी आतंकी चे घिवेरा के साथ 81 लोग वापस क्यूबा आये और क्यूबा में घुसते ही इनसे क्यूबा की पुलिस से मुठभेड़ हुई और 18 जिन्दा बचे जिसमे फिडेल और घिवेरा भी शामिल थे..2 राइफल और 18 लोगो के साथ शुरू हुआ सत्ता से संघर्ष ,1959 में क्यूबन तानाशाह फुलखेंशियो बतिस्ता को गद्दी से हटाकर फिडेल के सत्ता प्राप्त करने पर खत्म हुआ..कास्त्रो 47 साल तक क्यूबा के प्रधानमंत्री रहे..सिगार तथा बेसबॉल के शौक़ीन और यूएन में सबसे लंबा भाषण (लगभग साढ़े चार घंटे लगातार) देने वाले फिडेल कास्त्रो को सेक्स के लिए दिन में 2 से 3 अलग अलग लड़किया अपने बिस्तर पर चाहिए थी। क्यूबा के इस वामपंथी तानाशाह नेता के नाम कई जनसंहार और बिस्थापन दर्ज है मगर फिडेल के खाते में एक ऐसे क्रन्तिकारी तानाशाह(एकदलीय प्रणाली की छाया में बैठा हुआ तानाशाह) की छवि भी है जो अमरीका को आजीवन नाको चने चबवाता रहा.मगर इसी कारण क्यूबा पूरे विश्व से अलग थलग हो गया और वहां की अर्थव्यस्था तबाह हो गयी..फिडेल कास्त्रो एक ऐसा कम्युनिष्ट तानाशाह जिसके विरोधियों के पास दो ही रास्ते होते थे या तो वो मारे जायेंगे या क्यूबा छोड़ देंगे...फिडेल कास्त्रो एक ऐसा कम्युनिष्ट तानाशाह जिसे अमरीका समेत कई ख़ुफ़िया एजेंसिया मिल कर भी नहीं मार पाई..CIA ने फिडेल कास्त्रो को मारने के लिए 650 से ज्यादा बार प्रयास किये मगर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी हर बार विफल रही..
एक बार नास्तिक वामपंथी फिडेल कास्त्रो ने कहा था की मैं भगवान को नहीं मानता था मगर CIA और अमरीका द्वारा कई दशको तक मुझे मारने के सैकड़ो प्रयास के बाद भी मैं जीवित बचा हूँ,इससे मुझे लगने लगा है की भगवान होता है...
खैर आज फिडेल कास्त्रो इस दुनिया में नहीं है और शोक के साथ साथ एक बड़ा हिस्सा हवाना में जश्न भी मना रहा है..आने वाला समय और क्यूबा की अगली पीढी इस वामपंथी कम्युनिष्ट तानाशाह का क्यूबा के निर्माण (या विध्वंस)में योगदान को तय करेगी..
आशुतोष की कलम से

पीओके किसके बाप का ?


फारुख अब्दुल्ला ने कल एक जनसभा को संबोधित करते हुए भारत के 125 करोड  लोगों की भावनाओं पर कुठाराघात किया और  कहा कि क्या पीओके क्या आपकी (हिन्दुस्तान) बपौती है ? क्या पीओके उनके (हिन्दुस्तानियों) बाप का है ? जी हाँ हमारे....हम सबके बाप का है और रहेगा. असली मुद्दा है कि जो कश्मीर  पाकिस्तान के कब्जे में है वह कब वापस आएगा ? फारूक का ये बयान पूरे हिन्दुस्तान के लिए एक गाली है इसलिए बिना राजनीति किये सारे दलों को चाहिए कि न केवेल इसकी निंदा करें बल्कि उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की जाय उस पर भी एकमत होना चाहिए.

कुछ लोग बहुत भ्रम में जीते है उन्हें संदेह रहता है कि वे खुद  किसकी बपौती है ? हिन्दुस्तान की या पकिस्तान की ? क्या पीओके  उनकी बपौती है ? या पाकिस्तान उनका बाप है ? इतिहास गवाह है फारूक के बाप के नेहरू से बड़े अच्छे सम्बब्ध थे (कारण कुछ भी हो). उनके बाप शेख अब्दुल्ला ने भारत के साथ विश्वाश घात किया और  देशद्रोह किया. मजबूरी में नेहरू को उन्हें देश द्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डालना पड़ा. कम से कम हम हिन्दुस्तानियों के बाप देशद्रोही तो नहीं थे. आपके बाप की तुलना हमारे बाप से नहीं हो सकती. एक देश द्रोही का बेटा भी देश द्रोही  ही निकला .

कश्मीर को शुरू से ही केंद्र से इतनी वित्तीय सहायता मिलती रही है जितनी उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्यों को भी नहीं मिली और  जिसका वहा के नेताओं ने सिर्फ अपने हितों में स्तेमाल किया. क्या फारूक बता सकते है कि लन्दन में उनके पास अकूत संम्पति कहाँ से आई ? ये हम हिन्दुस्तानियों के बाप का पैसा है. आज नोट बंदी की वजह से फारूक के सिर्फ कुछ सौ करोड़ रुपये बेकार हुए हैं और इतनी बौखलाहट ? उन्हें चिंता है कि अब पत्त्थर कैसे फेंके जायेंगे ? आतंकबादी कैसे पाले जायेंगे और जब ये सब नहीं हो पायेगा तो भारत सरकार को ब्लैक मेल कैसे कर पाएंगे ? हिन्दुस्तान के पैसे से बाप बेटे दोनों ऐश कर रहे है. कश्मीर की समस्या सुलझ जायेगी तो इनका धंधा चौपट हो जायेगा. पुश्तैनी धंधा है भाई, भला कोइ इतनी आसानी से बंद करना चाहेगा?
इस तरह के देशद्रोहियों और पकिस्तान के समर्थन में खड़े होने वाले हर व्यक्ति का का हर स्तर पर विरोध होना चाहिए और इन्हें इनकी औकात में लाना चाहिए.

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शिव प्रकाश मिश्रा 
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रविवार, 9 अक्टूबर 2016

औचित्यहीन तीन तलाक प्रथा

मुस्लिम महिलाओं के संगठन ने तीन बार तलाक की प्रथा के खिलाफ अर्जी दी है और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उनकी राय जाननी चाही..केंद्र सरकार स्पष्ट रूप से उन महिलाओं के साथ खड़ी है और तीन तलाक प्रथा को औचित्यहीन बताया है..भारत तथाकथित और क़ानूनी रूप से एक सेकुलर देश है तो कानून सबके एक जैसे हो इससे भी इतर कई मुश्लिम देश तीन तलाक प्रथा के खिलाफ है तो भारत क्यों नहीं?? मानवाधिकार की दृष्टि से देखे दरअसल तीन तलाक प्रथा नारी शोषण के लिए उपयोग की जा रही है..
अगर कोई मुस्लिम युवक अपनी पत्नी को तीन बार तलाक तलाक तलाक बोल दे तो हो गया तलाक..कभी कभी दारु के नशे में बोल दे तलाक तलाक तलाक तो हो गया तलाक..कभी लड़ाई हुई और जोश में बोल दिया तलाक तलाक तलाक तो हो गया तलाक....अब रही बात जीवन यापन कैसे करेगी तो कांग्रेस के राजीव गांधी ने शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट के मुह पर थप्पड़ मारते हुए मुसलमान समुदाय के लिए कानून बना के ये निश्चित कर दिया की शौहर फूटी कौड़ी नहीं देगा तलाक के बाद... और तो और शौहर को अगर गलती का पछतावा हुआ तो इससे बड़ी पीड़ा उसकी पत्नी झेलेगी.मुस्लिम विवाह नियमो के अनुसार पहले वो किसी और शक्श से शादी करेगी उसके साथ सोयेगी फिर वो व्यक्ति उसको तलाक तलाक तलाक करके तलाक दे देगा उसके बाद वो पुनः अपने पुराने शौहर के पास चली जायेगी...
ये कैसा अत्याचार???गलती दारू के नशे में शौहर करे और भुगतान उसकी बेगम दूसरे के बिस्तर पर करे..क्षमा कीजिये ये भारत है इराक सीरिया लीबिया या सूडान नहीं..
सभी मुस्लिम संगठनो को आगे आके एक सुर में इस अत्याचारी प्रथा का विरोध कर मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाने में सहयोग करना चाहिए..विश्वास रखिये कठमुल्ले इसका विरोध करेंगे,फतवे देंगे मगर एक बार मुस्लिम बहनो ने ये बाधा पार कर ली तो विकास की अनंत संभावनाएं सामने हैं...
सबका साथ सबका विकास
जय हिन्द
आशुतोष की कलम से